उज्जैन:उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में पहुंचे 72 वर्षीय बुजुर्ग की कहानी सुन आप दंग रह जाएंगे. एक बुजुर्ग जिसके पास इंजीनियरिंग की डिग्री हो. जिसकी पेंशन 30 हजार है और खाते में 10 लाख रुपए जमा हैं. जो फर्राटेदार इंग्लिश भी बोलता है. लेकिन इंदौर जिला प्रशासन की एक लापरवाही ने उसे भिखारी बना दिया. दरअसल इंदौर जिला प्रशासन ने भिक्षुक मुक्त इंदौर मुहिम चलाई हुई है. भिक्षुक मुक्त इस मुहिम का शिकार फर्राटे दार अंग्रेजी बोलने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (मीसाबंदी) 72 वर्षीय देवव्रत चौधरी हो गए. उनकी मासिक पेंशन ही 30,000 है. उनके परिवार में एक भाई कर्नल तो एक भाई बैंक में अधिकारी है.
भिखारी समझकर टीम ले आई सेवाधाम आश्रम
देवव्रत ने इंदौर से उज्जैन के सेवा धाम आश्रम पहुंचने की पूरी कहानी सुनाई, कैसे वे इस मुहिम में फंस गए. मीसाबंदी देवव्रत चौधरी ने बताया कि, ”वे इंदौर के नयापुरा क्षेत्र के निवासी हैं. 15 सालों से हर रोज राजबाड़ा क्षेत्र में मां लक्ष्मी के मंदिर में दर्शन करने जाते हैं. 15 अप्रैल को भी वह मंदिर पहुंचे और मंदिर के बाहर 10 रुपए एक भिखारी को भीख दे रहे थे. तभी अचानक भिक्षुक मुक्त अभियान में शामिल टीम पहुंची और भिक्षुक के साथ उन्हें भी उनकी हालत देख कर गाड़ी में बैठाकर उज्जैन के सेवा धाम आश्रम ले आए.”
मेकेनिकल इंजीनियर रहे हैं देवव्रत चौधरी
उन्होंने बताया, ”वे मैकेनिकल इंजीनियर के पद से रिटायर्ड हुए हैं. वह सामाजिक कार्यकर्ता, गांधीवादी नेता विनोभा भावे के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने शादी नहीं की इसलिए उनके परिवार में बीवी बच्चे कोई नहीं हैं, वह अकेले रहते हैं. जिसकी वजह से वह खुद के रहन-सहन पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. इसलिए जिला प्रशासन की टीम ने उन्हें भिखारी समझ लिया था.” सेवा धाम आश्रम के संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि, ”जिस दिन वह यहां आए थे उनकी हालत उनके बताए अनुसार बिल्कुल नहीं थी. लेकिन लगातार उनसे चर्चा के बाद उनके बारे में पता चला. अब तक कुल 425 भिक्षुक इंदौर से आश्रम ले जा चुके हैं.”
मीसाबंदी देवव्रत चौधरी ने जताई आश्रम में रहने की इच्छा
बुजुर्ग देवव्रत चौधरी जो की मीसाबंदी हैं, उन्होंने अब उज्जैन के सेवा धाम आश्रम में ही रहने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा कि, ”मैं बीते 6 महीने से अपने भाइयों से नहीं मिल पाया. आश्रम में जो बच्चे हैं उनको अब मैं पढ़ाना चाहता हूं और उन्हीं के साथ समय बिताना चाहता हूं. यहां मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.” बुजुर्ग देवव्रत ने बताया कि, ”वह मुंबई में कई बड़ी कंपनियों में काम कर चुके हैं, कॉलेज में प्रेसिडेंट रह चुके हैं.”










