राजपूतों की नाराजगी के बावजूद जीते परषोत्तम रूपाला, कांग्रेस के पूर्व विधायक को 4.84 लाख वोटों से हराया

चुनावों से पहले क्षत्रिय समुदाय ने पूर्व शासकों के बारे में रूपाला की टिप्पणी को लेकर गुजरात के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया था. हालांकि उन अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी. अब उन्होंने इस सीट से इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक को हराया है.

लोकसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं और गुजरात की राजकोट सीट बीजेपी की बड़ी जीत हुई है. यहां से बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला ने क्षत्रिय आंदोलन और राजपूतों के विरोध के बावजूद 4,84,260 मतों से जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व विधायक परेश धनानी को हराया है राजकोट सीट की यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है.

बता दें कि चुनावों से पहले क्षत्रिय समुदाय ने पूर्व शासकों के बारे में रूपाला की टिप्पणी को लेकर गुजरात के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया था. हालांकि उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी, लेकिन कुछ समुदाय के नेताओं ने मांग की कि रूपाला की जगह किसी अन्य उम्मीदवार को लाया जाना चाहिए. जब ​​भाजपा ने उन्हें बदलने से इनकार कर दिया, तो समुदाय ने अपना आंदोलन तेज कर दिया और मतदाताओं से उन्हें हराने का आग्रह किया.

2002 में, धनानी ने राज्य की अमरेली विधानसभा सीट से रूपाला को हराया था. गुजरात की 25 लोकसभा सीटों के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे से मतगणना चल रही थी. राज्य की 26 लोकसभा सीटों में से 25 पर 7 मई को एक ही चरण में मतदान हुआ था. साल 2009 के चुनाव को छोड़कर 1989 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है

राजकोट गुजरात के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है. सौराष्ट्र में आने वाला राजकोट गुजरात का चौथा सबसे बड़ा शहर है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की आबादी 27,21,136 है, इसमें 35.11% ग्रामीण और 64.89% शहरी आबादी है. अनुसूचित जाति की आबादी 7.05% है. 2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक, यहां मतदाताओं की कुल संख्या 18,34,412 है. राजकोट जिले में करीब 10 फीसदी मुस्लिम आबादी है

शहर में स्थित केंद्रीय जुबली गार्डन में लैंग लाइब्रेरी है, जिसमें गुजराती साहित्य है. साथ ही,  वॉटसन संग्रहालय है, जिसमें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की  पेंटिंग और कलाकृतियां हैं. रोटरी गुड़िया संग्रहालय में दुनिया भर के गुड़ियों का संग्रह है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी राजनीतिक सफर का आगाज हुआ था, जब 2001 में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह राजकोट सीट से उपचुनाव में जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.

राजकोट लोकसभा सीट पर 1962 में पहली बार चुनाव हुआ और इसमें कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस के टिकट पर नवलशंकर ने यहां से पहला चुनाव जीता था. इस इलाके में पटेल वोट निर्णायक भूमिका में हैं. ज्यादा संख्या कड़वा पटेलों की है. साथ ही ब्राह्मण, क्षत्रिय, कोली और बनिया वोट भी यहां काफी है. शहरी इलाकों में खासकर ज्वैलरी का काम करने वाले व्यापारी हैं. इस इलाके में बड़े पैमाने पर ज्वैलरी का काम होता है. इसी के चलते राजकोट पश्चिम भारत का ज्वैल स्टेट भी कहा जाता है. राजकोट लोकसभा सीट जामनगर, राजकोट और सुरेंद्रनदर जिले में आती है. राजकोट लोकसभा के अंतर्गत तनकारा, राजकोट पश्चिम, जसदण, वांकानेर, राजकोट दक्षिण, राजकोट पूर्व और राजकोट ग्रामीण विधानसभा सीट है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें