राहुल गांधी के सभा में भीड़ देख डर गए मोदी……

*चोरी पकड़ी गई, मोदी सरकार में मचा हड़कंप*

राहुल गांधी की रैली में आने वाली भीड़ से मोदी को इतना डर लग गया कि तुरंत गोपनीय मीटिंग बुलाई और उनकी तेलंगाना में हुई रैली का वीडियो यूट्यूब से गायब करवा दिया। इस पर यूट्यूब का कहना है कि इसमें स्युसाइडल व हार्मफुल कंटेंट हो सकता है।

चुनावी रैलियों में मोदी को देखने-सुनने वालों की संख्या बहुत कम हो गई है। यही नहीं उनके यूट्यूब पर भी दर्शकों की संख्या राहुल गांधी के मुकाबले 2 प्रतिशत भी नहीं है।

शाजापुर (मध्यप्रदेश) में 30 सितंबर को हुई राहुल गांधी की जन आक्रोश रैली को यूट्यूब पर 20 लाख 20 हजार लोगों ने देखा जबकि उसी दिन विलासपुर छत्तीसगढ़ में भाजपा की परिवर्तन यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित मोदी की मेगा रैली को यूट्यूब पर सिर्फ 1 लाख 50 हजार लोगों ने देखा।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के जो सर्वे विभिन्न चैनलों व अन्य मीडिया आउटलेट्स पर आ रहे हैं उनमें कांग्रेस के मुकाबले भाजपा पिछड़ गई है। जिन मोदी को बिकाऊ मीडिया विश्वगुरु प्रचारित करते हुए चुनाव में अजेय बताता नहीं थकता था, वह भी इन चुनावों में भाजपा की पराजय बता रहा है।

अब से करीब छः महीने बाद लोकसभा चुनाव होने हैं और इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को उसका सेमीफाइनल बताया जा रहा है तो इनमें मोदी और उनकी पार्टी का पूरा सफाया होने से इसका असर लोकसभा चुनाव पर भी पड़े बिना नहीं रहेगा।

इस तरह लगातार घटती लोकप्रियता से घबराकर मोदी सरकार अब सोशल मीडिया को कंट्रोल करने में जुट गई है। जनता की असहमति, उसके सरोकारों और प्रतिक्रिया को दबाने के लिए किये जा रहे इतने बड़े खेल का भंडाफोड़ द वॉशिंगटन पोस्ट ने किया है।

अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में बताया है कि हर दूसरे हफ्ते फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर के बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ सरकारी तंत्र लगातार गुप्त बैठक कर यह सुनिश्चित करता है कि क्या दिखाना-छापना चाहिए और क्या नहीं।

इस तरह चोरी-छिपे की जा रही इस कार्रवाई की रिपोर्ट के छपने से मोदी सरकार में हड़कंप मच गया है।

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