भाजपा, जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ‘भ्रष्टाचार के लिए शून्य सहिष्णुता’ का दम भरा और जिसके फलस्वरूप पहली बार अपने बलबूते पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई उसे अब दाग अच्छे लगने लगे हैं. अभी हाल फिलहाल दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल होने का सिलसिला जारी है. चाहे वो पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस के मुकुल रॉय हों, हिमाचल प्रदेश में सुखराम हों, असम से हेमंत विश्व शर्मा हों या फिर महाराष्ट्र से नारायण राणे हों. पूर्व में इन सभी चेहरों पर भ्रष्टाचार के कुछ न कुछ आरोप लगे हैं. और सबसे मजेदार बात ये कि तब भाजपा ने खुद ही इन लोगों के खिलाफ बुकलेट जारी की थी और संसद को चलने नहीं दिया था.
वर्तमान भाजपा को देखकर यही कहा जा सकता है कि वो दागियों को अपने में शामिल कर रही है
लेकिन अब सवाल ये उठने लगा है कि जो पार्टी खुद को अपने ‘चाल, चरित्र और चेहरे’ के आधार पर सभी पार्टियों से अलग यानि ‘पार्टी विद डिफ्रेंस’ का नारा देती थी वो दूसरी पार्टियों से भ्रष्टाचार में आरोपित दागियों को, पार्टी में क्यों शामिल कर रही है?एक नज़र ऐसे ही नेताओं पर जो हाल – फिलहाल भाजपा में शामिल हुए हैं.
जिस मुकुल रॉय को भाजपा अपने खेमे में लाई है उनपर भी तमाम आरोप हैं
लूमुकुल रॉय
तीन नवंबर को तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता और शारदा घोटाले में आरोपी मुकुल रॉय ने भाजपा ज्वाइन की. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे मुकुल रॉय से सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में शारदा चिटफंड घोटाले मामले में पूछताछ की थी. लेकिन मुकुल रॉय को भाजपा में शामिल होने के एक दिन बाद ही केंद्र की तरफ से वाई प्लस सुरक्षा दे दी गई.










