ओ रि चिरैया… मेरी बिटिया…. बेटी का भी हक बेटे के बराबर है

बाबुल प्यारे…. हमेशा बेटियों में बाप कि जान बसती है, हर बाप अपनी बेटी को दुनिया कि सारी खुशियां देना चाहता है, बेटी कभी भी अपने पिता के लिये बोझ नहीं,गर्व होती है। राँची के रहने वाले प्रेम गुप्ता ने अपनी बेटी साक्षी को उसके ससुराल से बैंड-बाजे, आतिशबाजी के साथ वापस अपने घर ले आये। साक्षी को उसके ससुराल वाले लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। जिस समाज में सब ये मान बैठते हैं कि शादी के बाद बेटी परायी हो जाती है वैसे समाज में पिता का यह व्यवहार गर्व से भर देने वाला है। प्रेम जी ने बिल्कुल सही किया, शादी दुबारा हो सकती है लेकिन जिंदगी एक ही बार मिलती है वो दुबारा नहीं मिलती। बेटी मरी हुई से बेहतर मायके में रहे। जैसे घर के और सदस्य रहते हैं वैसे ही बेटी भी रहेगी, जैसे सारे सदस्य खाएंगे पहनेंगे वैसे बेटी भी, समाज के लालची भेड़ियों के लिए प्रेम गुप्ता जी ने ये बहुत बड़ा सवक दिया है।

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