19 गेंदों में 45 रन… फिर भी टीम से बाहर! आखिर प्रतिभा बड़ी या सीनियर होने का रुतबा?
भारतीय क्रिकेट में 27 अक्टूबर 2026 को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मुकाबले में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने ऐसा तूफान मचाया कि हर क्रिकेट प्रेमी का ध्यान उनकी ओर चला गया।
जरा आंकड़ों पर गौर कीजिए:
वैभव सूर्यवंशी — 19 गेंदों में 45 रन।
अभिषेक शर्मा — 38 गेंदों में 113 रन।
दोनों के बीच सिर्फ 43 गेंदों में 133 रनों की ओपनिंग साझेदारी।
भारत ने पावरप्ले में बिना विकेट खोए 118 रन बनाए और 199 रनों का लक्ष्य महज 13.2 ओवर में हासिल कर लिया।
यह कोई साधारण प्रदर्शन नहीं था। इस साझेदारी ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पावरप्ले के दौरान बल्लेबाजी का नया इतिहास रच दिया।
लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू होती है!
जैसे ही ईशान किशन की वापसी का सवाल उठा, वैभव की टीम में जगह पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी संकेत दिया कि ईशान की वापसी पर वैभव को बाहर बैठना पड़ सकता है।
अब जरा इस विरोधाभास पर गौर कीजिए!
एक तरफ कहा जाता है कि वैभव अभी बच्चा है, उस पर उम्मीदों का बोझ मत डालिए। दूसरी तरफ, जब वही बच्चा मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब देता है, तो उसकी जगह पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
वाह रे क्रिकेट की दुनिया! यहाँ प्रतिभा को मौका देने की बात तो खूब होती है, लेकिन मौका मिलने पर प्रतिभा को लगातार खेलने देने की गारंटी कौन देगा?
और व्यंग्य देखिए साहब!
लगता है भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की जरूरत कम और चाटुकारिता की जरूरत ज्यादा है! यहाँ रन बनाने से ज्यादा जरूरी शायद यह हो गया है कि आप किसके पसंदीदा हैं और किसकी जगह लेने की हिम्मत कर रहे हैं!
हालाँकि, टीम चयन केवल एक पारी के आधार पर नहीं होता। अनुभव, टीम का संतुलन और भविष्य की रणनीति भी मायने रखते हैं। लेकिन अगर किसी युवा खिलाड़ी को मौका दिया जाता है, तो उसके प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन भी होना चाहिए।
सवाल ईशान किशन को खिलाने का नहीं है। सवाल यह है कि वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी जगह पक्की करने के लिए आखिर कितनी बार खुद को साबित करना पड़ेगा?
याद रखिए: प्रतिभा को उम्र से नहीं, प्रदर्शन से परखिए। सीनियर का सम्मान जरूरी है, लेकिन जूनियर की मेहनत का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि भारतीय क्रिकेट में सितारे बनाने से ज्यादा मुश्किल उन्हें लगातार चमकने का मौका देना है?
आपकी राय क्या है? वैभव को लगातार ओपनिंग का मौका मिलना चाहिए या सीनियर खिलाड़ी की वापसी होते ही उन्हें बाहर बैठा देना सही है? अपनी राय जरूर दीजिए!









