अब इसे किस्मत कह लें या फिर मोकामा के वर्षों से विधायक रहे अनंत सिंह की मतदाताओं पर भावनात्मक पकड़, एक अजीब बात उनके राजनीतिक करियर की यह है कि जब भी किसी आपराधिक घटना के हवाले से अनंत सिंह की चूलें कसने पर प्रशासन आमादा होता है, वो राजनीतिक रूप से और भी ताकतवर होते जाते रहे हैं। अब इसे पुटूस हत्याकांड से जोड़ कर देखें या फिर एके 47 कांड, अनंत सिंह राजनीतिक रूप से और भी मजबूत हो कर उभरे। उनकी ये खासियत एक तरह से उन्हें नीतीश कुमार के बराबर भी खड़ी करती है।
बिहार की राजनीति में बाहुबली के नाम से जाने जाने वाले मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार की राजनीति अपराध की छाया से मुक्त नहीं हो पाई। जब-जब उन पर कानूनी शिकंजा कसा या उन्हें पार्टियों से निकाला गया, वह और अधिक ताकतवर बनकर उभरे हैं। इसके लिए इन दो खास घटनाओं के बारे में जानना जरूरी है।










