बेबी बॉस (वैभव सूर्यवंशी) को न खिलाकर, गौतम – अय्यर को करना पड़ रहा है आलोचना का सामना…

वैभव सुर्यवंशी को आज के मैच में बिना मौका दिए गौतम गंभीर चले थे मैच जितने, आयरलैंड जैसी टीम से भी बुरी तरह हार गये |

“वैभव सुर्यवंशी” कि बैटिंग देखने के लिए जनता स्टेडियम पहुंचा था, और वैभव सुर्यवंशी को ही मौका नहीं दिया गया | जबकि, आयरलैंड, नीदरलैंड व यूएई जैसी टीमों के खिलाफ हमेशा युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाता रहा है, लेकिन आज वैभव सुर्यवंशी को मौका ना देकर सिनीयर प्लेयर खिलाए गये…

खेल जगत हो या ज्युडिशियल
राजनिति हो या न्यूज मिडिया

जातिवाद हर जगह हावी है, इकोसिस्टम के द्वारा प्रतिभा का शोषण हर जगह किया जा रहा है |

आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी डेब्यू नहीं कर रहे हैं। 15 साल के वैभव को टीम में शामिल किया गया था। सभी को उम्मीद थी कि आईपीएल 2026 में ऑरेंज कैप जीतने वाले वैभव को भारत का टी20 कैप मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं किया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस के समय बताया कि वैभव इस मैच में नहीं खेल रहे हैं।

वैभव सूर्यवंशी को क्यों नहीं मिला मौका ?
भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि सही समय आने पर वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलेगा। टॉस के समय अय्यर से सवाल किया गया कि क्या वैभव सूर्यवंशी भारत के लिए डेब्यू कर रहे हैं। उन्होंने इसके जवाब में कहा, ‘दुर्भाग्य से, नहीं। वह एक शानदार खिलाड़ी हैं, लेकिन हमारे पास कुछ बेहतरीन खिलाड़ी हैं जिन्होंने हमारे लिए अच्छा प्रदर्शन किया है, इसलिए हम उन पर भरोसा कर रहे हैं। सही समय आने पर उन्हें भी मौका मिलेगा।’

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वैभव सूर्यवंशी जैसा खिलाड़ी किसी लॉबी या PR का मोहताज नहीं होना चाहिए।

जब किसी असाधारण प्रतिभा को लगातार मौके नहीं मिलते, तब सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि किसी खिलाड़ी का PR कमज़ोर है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी प्रतिभा भी कम है।

वैभव ने जितनी उम्र में अपनी क्षमता दिखाई है, उतनी उम्र में बहुत कम खिलाड़ी उस स्तर तक पहुँच पाते हैं। ऐसे खिलाड़ियों को लगातार अवसर मिलना चाहिए ताकि वे खुद को साबित कर सकें।

हम किसी दूसरे खिलाड़ी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रतिभा के साथ न्याय होना चाहिए। चयन का आधार केवल प्रदर्शन और क्षमता होनी चाहिए, न कि किसी की लॉबी या प्रचार।

भारतीय क्रिकेट को ऐसे खिलाड़ियों की ज़रूरत है जो आने वाले वर्षों में देश का भविष्य बन सकें। वैभव सूर्यवंशी उन विशेष प्रतिभाओं में से एक हैं।

वैभव को लगातार मौके मिलें ..यही भारतीय क्रिकेट के हित में है।

आयरलैंड के खिलाफ भारतीय टीम की 34 रनों की हार केवल एक साधारण हार नहीं है। यह उन सवालों को भी जन्म देती है, जो मैच शुरू होने से पहले ही उठने लगे थे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की बात करता है, तो फिर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज को आखिर लगातार बाहर क्यों रखा गया?

मैच से पहले ही क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह चर्चा तेज थी कि आयरलैंड जैसी टीम के खिलाफ अगर प्रयोग नहीं किए जाएंगे, तो फिर कब किए जाएंगे। वैभव सूर्यवंशी को स्क्वॉड में शामिल करना एक बड़ा फैसला था, लेकिन जब प्लेइंग इलेवन घोषित हुई तो उनका नाम बाहर था। इसके बाद टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ाई और हार के बाद यह बहस और तेज हो गई।

हालांकि केवल इस हार का पूरा जिम्मेदार वैभव की गैरमौजूदगी को ठहराना भी उचित नहीं होगा। क्रिकेट 11 खिलाड़ियों का खेल है। अगर भारत 34 रन से हारा है, तो उसके पीछे बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों की सामूहिक असफलता जिम्मेदार है।

लेकिन यह भी सच है कि वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी को लेकर जो उत्साह दिखाई दे रहा है, उसके पीछे केवल सोशल मीडिया का शोर नहीं है। आईपीएल में उनकी निडर बल्लेबाजी, बड़े गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रवैया और कम उम्र में दबाव झेलने की क्षमता ने लोगों को प्रभावित किया है। यही वजह है कि हर मैच के बाद उनका नाम चर्चा में आ जाता है।

भारतीय टीम प्रबंधन शायद वैभव को जल्दबाजी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नहीं उतारना चाहता। 15 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव बहुत बड़ा होता है। चयनकर्ता और कोचिंग स्टाफ संभवतः उनके विकास को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना चाहते हैं ताकि लंबी अवधि में उनका करियर मजबूत बने।

लेकिन दूसरी ओर यह तर्क भी मजबूत है कि आयरलैंड जैसी टीम के खिलाफ, अपेक्षाकृत कम दबाव वाले मुकाबलों में ऐसे खिलाड़ियों को अवसर देना ही भविष्य की तैयारी कहलाता है। अगर युवा खिलाड़ियों को केवल स्क्वॉड में रखकर अनुभव दिलाना है और मैदान पर मौका नहीं देना है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस हार ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारतीय टी-20 टीम अभी भी अपनी सर्वश्रेष्ठ संयोजन की तलाश में है। कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका, कुछ युवा खिलाड़ियों का इंतजार और टीम संतुलन की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

वैभव सूर्यवंशी को खिलाया जाता तो क्या भारत यह मैच जीत जाता? इसका जवाब कोई निश्चित रूप से नहीं दे सकता। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस हार के बाद उनके डेब्यू की मांग पहले से कहीं ज्यादा तेज हो जाएगी।

क्योंकि क्रिकेट में कई बार हार केवल स्कोरबोर्ड पर नहीं होती, बल्कि चयन संबंधी फैसलों पर भी सवाल छोड़ जाती है। और आयरलैंड के खिलाफ यह हार फिलहाल उन्हीं सवालों को जन्म दे रही है।

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