क्या बिहार में फिर जंगलराज कि शुरुआत हो गई है….???

शाहपुर के युवक के बारे में जबसे खबर चली, कुछ समय बाद स्वाभाविक तौर पर उसको जानने की इच्छा हुई। आज सुबह से उसको फेसबुक के माध्यम से जानना चाहा।

हम उसके विचारधारा का समर्थन नहीं करते, क्योंकि आज की तारीख में सत्ता ने जो इस्लामोफोबिया आम जन मानस में डाल रखा है संभवतः भरत तिवारी भी उस रोग से पीड़ित था। लेकिन अभी हाल के दिनों के उसके क्रियाकलापों को देखा जाए तो वह प्रशासन और नेताओं के वादाखिलाफी से काफी त्रस्त युवक था। उसने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अपनाते हुए जवैनिया गांव के पीड़ितों की समस्या के लिए काफी गुहार लगाई थी। शासन प्रशासन का उसकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक असर नहीं दिखा। तब जाकर उसने इस पहलकदमी को लिया। उसने दो दिन पहले इन व्यवस्थाओं का जिम्मेदार अपने एसडीएम को मानते हुए दो दिन का समय देकर चेतावनी दिया था। उसी चेतावनी के बाद पुलिस उसके घर पहुंची थी जहां पुलिस के साथ उसकी बातचीत और कुछ फायरिंग की वीडियो उसके फेसबुक आईडी पर लाइव चलाई गई है। बुधवार को भी बातचीत के बाद लगभग मामला सुलझ गया था जिसमें उसने हथियार को पुलिस की तरफ सौंप भी दिया था ( इसका लाइव वीडियो उसके फेसबुक पर मौजूद है )।

अब जाके खबर आ रही है एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई है।

सबसे पहली बात, पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति में उस युवक को मानसिक रोगी बताया गया था जिसका ईलाज कराया जाना था। पुलिस ने एक मानसिक रोगी का एनकाउंटर कैसे कर दिया, क्या पुलिस तंत्र इसका जवाब दे सकेगा ?

दूसरी बात, उसके फेसबुक लाइव वीडियो में एकदम स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि वह बिल्कुल निर्भीक तौर पर पुलिस की गोलीबारी के बीच रोड पर खड़ा है और अपनी हर बात को सामने रख रहा है और अंततः डीएसपी के आने के बाद आखिरी वार्ता कर अपना हथियार उनकी तरफ फेंक भी दिया था। फिर उसके एनकाउंटर की जरूरत क्यों पड़ी ? जबतक उसकी तरफ से गोली चलाया जा रहा था तब यह एनकाउंटर क्यों नहीं हो सका था ?

कुल मिलाकर, ये घटना समाज में व्याप्त कुव्यवस्था की पोल खोल रहा है। जब एक व्यक्ति लोकतांत्रिक तौर पर अपनी मांगों को रख रहा होता है तो उसका दमन सरेआम कर दिया जाता है जेल और लाठीचार्ज के माध्यम से। क्या जनता की लोकतांत्रिक मांगो पर शासन की तरफ से निवारणात्मक पहल ली जाती है ?

एक युवक ने अपना बलिदान दे दिया, लेकिन उसने कई सवालों को जनता और सिस्टम के सामने छोड़ दिया है।

लगता है एक बार फिर बिहार में जंगलराज की शुरुआत हो चुकी है 

और पढ़ें