कुछ दिनों पहले अचानक घटी एक घटना के बाद छत्तीसगढ़ करणी सेना अध्यक्ष विरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ छत्तीसगढ़ में लगातार छापेमारी व आनन-फानन में जिस तरह से कार्यवाही की जा रही है, यह एक बड़ा सवाल उठा रहा है। आखिरकार, वीरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ क्या किसीने सुपारी ली है? या यह किसी तरह का कोई राजनीतिक एजेंडा है?
साल 2019 में वीरेंद्र सिंह तोमर के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। वीरेंद्र सिंह तोमर ने कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हुए पिछले कई सालों से किसी भी तरह की आपराधिक मामलों से दूरी बना ली। वे करणी सेना द्वारा किये जा रहे सामाजिक कार्यों में संलग्न रहें। वे खुद अपने स्तर पर भी लोगों से मिलना जुलना करते रहे हैं। लेकिन साल 2019 के बाद कभी उनके खिलाफ कोई आपराधिक छोटा या बड़ा मामला नहीं आया।
ऐसे हालात में सवाल उठता है कि आखिर ऐसी क्या घटना घटी जिसके बाद अचानक साल 2025 में पुलिस व प्रशासन सभी एक्टिव हो गए हैं। लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस, ईडी, इंटेलिजेंस, शासन और प्रशासन सभी ने अचानक से रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में छापेमारी शुरु कर दी। तीन दिन के भीतर ही जमीन, जायदाद से लेकर गाड़ी तथा अन्य संपत्तियां तक सीज कर ली गई। और अब रायपुर नगर निगम भी इस मामले में कूद पड़ा है।
क्या इन सभी कार्यवाहियों के पीछे सरकार के किसी आदमी का हाथ है? या सरकार खुद ही इस मामले को देख रही है? या किसी बाहरी दबाव में यह सभी कार्यवाही की जा रही है? यह सवाल अब लोगों के मन में उठने लगे हैं। लेकिन मामले में कोई कुछ समझ नहीं पा रहा है, इसलिए सभी खामोश हैं।
सवाल उठता है कि आखिर ऐसा अचानक से क्या हुआ कि घर के बच्चों और महिलाओं तक को नहीं बख्शा जा रहा है। अगर अपराध हुआ है तो जिसने किया है, पुलिस-प्रशासन उसे ढूंढने के बजाय बच्चों और महिलाओं को डराने तथा संपत्तियों को जब्त करने में अधिक दिलचस्पी ले रही है। यह घटना सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर इन सभी के पीछे पुलिस की मंशा क्या है? पुलिस किसके इशारे पर यह सभी कुछ कर रही है?
वीरेंद्र सिंह तोमर किसी भी पार्टी से जुड़े नेता नहीं रहे हैं। वे करणा सेना के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष रहे हैं और करणी सेना के जरिए ही अपनी पहचान बनायी है। जितनी उनकी पहचान भाजपा नेताओं से रही है, उतनी ही कांग्रेस नेताओं से भी बेहतर संबंध रहे हैं। तो भाजपा की सरकार में आखिर यह कार्रवाई किसी भी समझ से परे है! आखिर ऐसा क्यों? छत्तीसगढ़ में हजारों आपराधिक छवि वाले लोग खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ तो पुल्स व सरकार ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है।
एक तरफ हम माओवादियों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने पर करोड़ों-अरबों रुपये लुटा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और कानून की नजर में कोई आपराधिक व्यक्ति है और वह एक आम जिन्दगी जी रहा है तो उसे किसी भी हद तक बर्बाद कर देने की योजना बनायी जा रही है।
जो भी हो, यह तय है कि किसी ने वीरेंद्र सिंह तोमर को बर्बाद करने या जान से मार देने की सुपारी ली है या किसी ने दी है। और अगर यह सच है तो आज नहीं तो कल यह बात जनता के सामने जरूर आएगी। यह भी सामने आएगा कि आखिर सुपारी लेने व देने का क्या कारण रहा। लेकिन इतना तय है कि इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई बेहद संदेह के घेरे में है।



