रेलवे ने 6.9 लाख शिशुओं (infants) से सीटों के बदले वसूला वयस्कों के बराबर किराया ।

रेलवे ने 6.9 लाख शिशुओं (infants) से सीटों के बदले वसूला वयस्कों के बराबर किराया ।

रेलवे ने 6.9 लाख Infants (नौनिहालों/शिशुओं ) उम्र 1-4 साल तक से बर्थ/सीटों के बदले ₹ 39 करोड़ से अधिक की राशि कमाई ।

रेलवे के नियम अनुसार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आप अपने साथ मुफ्त में ले जा सकते हैं इसके लिए किसी अतिरिक्त टिकट की आवश्यकता नहीं है परंतु यदि आप ऐसे बच्चे के लिए अलग बर्थ /सीट लेना चाहते हैं तो आपको पूरा किराया देना होगा यानिकि अलग सीट मांगने पर एक से चार साल तक के बच्चों के लिए भी आपको वयस्कों के बराबर किराया चुकाना होगा ।
इसी से जुड़ी एक आरटीआई पड़ताल पर रेलवे ने मुझे बताया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 (सितंबर 24 तक) की साढ़े तीन साल की अवधि के दौरान ही रेलवे ने 6,93,868 infants / शिशुओं (उम्र 1 से 4 साल तक ) से अलग से बर्थ /सीट लेने के एवज में वयस्कों के बराबर किराया ( या पूरा किराया) वसूल कर ₹ 39,88,62,235 (₹39.88 करोड़) की राशि कमाई है ।

सबसे पहले रेलवे ने अप्रैल 2016 में 5 से 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आधे टिकट पर बर्थ/सीट देना बंद किया फिर नंबर आया वरिष्ठ नागरिकों की रियायत पर कैंची चलाने का तो रेलवे ने मार्च 2020 में कोरोना की आड़ में सीनियर सिटीजन को मिलने वाली रियायती रेल टिकट की सुविधा छीन ली और फिर आरटीआई में आंकड़े दिए कि रेलवे ने दूधमुंहे बच्चों (infants) के लिए अलग बर्थ की मांग करने पर उनसे पूरा किराया वसूल कर ₹ 39 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है फिर भी हम अपने आप को एक लोक कल्याणकारी, बाल हितैषी और प्रगतिशील राज्य कहकर गाल फुलाते रहते हैं ।

धन्य है हमारी रेल और हमारे कर्णधार !!!

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