पाटन विधायक भूपेश बघेल के बेहद करीबी और भिलाई चरौदा नगर निगम के सभापति कृष्णा चंद्राकर का अग्रिम जमानत आवेदन दुर्ग कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कृष्णा चंद्राकर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज है
विधायक भूपेश के क़ाफ़िले के सामने हूटिंग से नाराज़ होकर अपहरण और पिटाई का आरोप
विधायक भूपेश बघेल के क़ाफ़िले के सामने बीते 24 अगस्त को सिरसा गेट के सामने युवाओं ने हूटिंग की थी। इस हूटिंग के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश के सुरक्षाकर्मियों से उपद्रवी युवाओं की धक्कामुक्की हुई थी। इस घटना के बाद उपद्रव करने वाले युवाओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया गया था। नगर निगम सभापति कृष्णा चंद्राकर तथा उनके साथियों पर आरोप है कि उन्होंने भूपेश के क़ाफ़िले के सामने हूटिंग करने वाले युवाओं में से एक युवा का अपहरण कर उसकी पिटाई की और थाने लाकर थाने में भी पिटाई की। पुलिस ने कृष्णा चंद्राकर और उनके साथियों के खिलाफ बीएनएस की
। पाटन विधायक भूपेश बघेल के बेहद करीबी और भिलाई चरौदा नगर निगम के सभापति कृष्णा चंद्राकर का अग्रिम जमानत आवेदन दुर्ग कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कृष्णा चंद्राकर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज है।
विधायक भूपेश के क़ाफ़िले के सामने हूटिंग से नाराज़ होकर अपहरण और पिटाई का आरोप
विधायक भूपेश बघेल के क़ाफ़िले के सामने बीते 24 अगस्त को सिरसा गेट के सामने युवाओं ने हूटिंग की थी। इस हूटिंग के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश के सुरक्षाकर्मियों से उपद्रवी युवाओं की धक्कामुक्की हुई थी। इस घटना के बाद उपद्रव करने वाले युवाओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया गया था। नगर निगम सभापति कृष्णा चंद्राकर तथा उनके साथियों पर आरोप है कि उन्होंने भूपेश के क़ाफ़िले के सामने हूटिंग करने वाले युवाओं में से एक युवा का अपहरण कर उसकी पिटाई की और थाने लाकर थाने में भी पिटाई की। पुलिस ने कृष्णा चंद्राकर और उनके साथियों के खिलाफ बीएनएस की धारा
115(2),140(3),189(2),190,296,3(5),351 (2) के तहत मामला क़ायम किया है। कृष्णा चंद्राकर का अग्रिम जमानत आवेदन दुर्ग कोर्ट
कोर्ट ने ज़मानत आवेदन ख़ारिज किया
कोर्ट ने ज़मानत आवेदन ख़ारिज करते हुए आदेश में लिखा है -“केस डायरी के अवलोकन से प्रकरण में अभियुक्त की संलिप्तता प्रथम दृष्टया दर्शित हो रही है। जहां तक गुप्त रुप से और सदोष परिरोध किये जाने के आशय से अपहरण या व्यवहरण का प्रश्न है, इस स्तर पर यह विनिश्चित नहीं किया जा सकता। केस डायरी के अनुसार अभियुक्त के खिलाफ पूर्व में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज होना दर्शित है। प्रकरण विवेचना के स्तर पर है और अन्य साक्ष्य का संकलन किया जाना है इस स्तर पर आवेदक/आरोपी को ज़मानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होने से आवेदन निरस्त किया जाता है










