मुर्दा शहर नया रायपुर में मनहूसियत को तोड़ने के लिए क्या ज़रूरती है

मुर्दा शहर नया रायपुर में हल्के-फुल्के तौर पर ही सही जान फूंकने के लिए कम से कम विचार होना तो शुरु हुआ। सुनने में यही आ रहा है कि पुराना रायपुर से अभनपुर तक मेमू ट्रेन चलेगी, जो कि नया रायपुर से होकर गुजरेगी। इसका किराया 10 से 20 रुपये के बीच होगा। यदि ऐसा होता है तो अच्छी बात है, लेकिन यह भी तो सोचने वाली बात है कि मेमू ट्रेन मुम्बई की लोकल या मेट्रो ट्रेन की तरह थोड़ी-थोड़ी देर में तो उपलब्ध होगी नहीं। यानी टाइम के बंधन में बंधे रहने वाली मेमू ट्रेन का इंतज़ार बहुत से लोगों को खलता नज़र आएगा। यह तो बात रही रेल परिवहन की, देखा जाए तो नया रायपुर की तरफ ज़्यादा ज़रूरत है सड़क परिवहन की। नया रायपुर के चक्कर लगाने का दर्द वह आम आदमी ही बयां कर सकता है जिसका कितना ही समय आने-जाने तथा इस बिल्डिंग से उस बिल्डिंग में जाने में गुजर जाता है। पिछली कांग्रेस सरकार ने नया रायपुर को नया रंग देने काफ़ी कुछ सोच रखा था लेकिन उसे वह सब करने का मौका ही नहीं मिला। अब सब कुछ साय सरकार के हाथ में है। नया रायपुर में हरियाली से आच्छादित पेड़ पौधों की डंगालियां अक्सर सुनसान माहौल में सांय-सांय करती झूमती नज़र आती हैं। अब वहां सांय सांय सुविधाएं जुटाते हुए मनहूसियत को तोड़ने की ज़रूरत है

 

 

 

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