वित्त तथा वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने ग़लत पंजीयन कर सरकार के राजस्व को नुक़सान पहुँचाने के आरोप में प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने पर वाणिज्यिक कर विभाग के तीन डिप्टी रजिस्ट्रारों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। फ़ायनेंस मिनिस्टर ओ पी के तल्ख तेवर से विभाग में हड़कंप मच गया है।
ये हुए निलंबित
वित्त तथा वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने जिन्हें सस्पेंड किया है, उनमें रायपुर की डिप्टी रजिस्ट्रार श्रीमती मंजूषा मिश्रा, रायपुर के तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार सुशील देहारी और दुर्ग की तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार श्रीमती शशिकांत पात्रे शामिल हैं।
इस तरह हुआ सरकार को नुक़सान
रायपुर की सीनियर डिप्टी रजिस्ट्रार श्रीमती मंजूषा मिश्रा पर आरोप है कि गाइडलाइन कंडीशन का पालन नहीं किया और गलत मुल्यांकन कर पंजीयन शुल्क में सरकार को 87 लाख 12 हजार 714 रुपए का नुक़सान पहुँचाया जबकि सुशील देहारी ने अपने कार्यकाल में वाणिज्यिक और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को स्टांप शुल्क से अनियमित छूट दी है उनके कार्यकाल में दान विलेख और विक्रय विलेख में गलत मुल्यांकन कर शुल्क के रुप में सरकार को 55 लाख 42 हजार 677 का नुकसान पहुँचाया गया इसी तरह दुर्ग में तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार श्रीमती शशिकांता पात्रे ने गलत मुल्यांकन कर सरकार को शुल्क के रुप में 21 लाख 14 हजार 689 रुपए का नकसान पहुँचाया गया।तीनों ही अधिकारियों के विरुध्द विभागीय सतर्कता प्रकोष्ठ ने जाँच कर प्रतिवेदन तैयार किया है जिसमें उन्हें प्रारंभिक तौर पर दोषी पाया गया है
मंत्री ओ पी बोले – जनता को परेशानी और भ्रष्टाचार दोनों बर्दाश्त नहीं
वित्त तथा वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का कडाई से पालन करने की बात कही है। वित्त तथा वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने द हिट डॉट इन से कहा – हमने पहले कहा है, जनता को अनावश्यक परेशानी और भ्रष्टाचार दोनों ही बर्दाश्त नहीं होगा इस पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है। जो भी अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाएगा उसे नहीं बख्शेंगे। यह सुशासन की सरकार है










