एक ओर जंहा जिला प्रशासन जल गंगा संवर्धन अभियान चला कर जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार व पुनर्जीवन का काम कर रहा है, तो दूसरी ओर जिले में लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हाल ये है कि लोगों को पानी के लिए सुबह 4 बजे से उठकर जद्दोजहद करना पड़ रहा। हैरत की बात यह है कि आज तक गांव में नल जल योजना भी नहीं पहुंची है।
बूंद बूंद पानी को तरस रहे लोग आज भी आसमानी पानी यानी मानसून का इंतजार कर रहे हैं, कि कब बारिश हो और पानी की समस्या से छुटकारा मिल सके। सिस्टम को तमाचा मारने वाली यह तस्वीर शहडोल जिले के बुढार जनपद के साबो ग्राम पंचायत की है। जिले के जनपद पंचायत बुढार के ग्राम पंचायत सबो समेत बिलटुकरी, बकहो, सिंधली, सहित अन्य आसपास के गांव मुख्य रूप से साबो गांव में पानी को लेकर हालात बद से बत्तर है।
आलम ये है कि लोगों को पानी के लिए सुबह 4 बजे से जूझना पड़ता है। गांव से दूर जा कर पानी ला कर अपना गुजारा करना पड़ रहा है। गांव में वाटर लेबल डाउन होने के कारण हैंडपंप और कुएं भी सूख गए है। आज तक गांव में नलजल योजना भी नहीं पहुंची है।
मामले में गांव के सरपंच का कहना है कि उनके गांव के पानी की समस्या है। आजतक नल जल योजना गांव में नहीं पहुंची। उसके लिए उन्होंने प्रयास भी किया था, लेकिन विफल रहे, जिला प्रशासन से पानी की समस्या के निदान के लिए अवगत कराया गया है। जल्द ही पानी की समस्या से इजात मिल जाएगा। वहीं इस पूरे मामले में जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी कहने से बचते दिखाई दिए।
इधर गांव-गांव घर-घर नल जल योजना के तहत लोगों को सुचारू रूप से पानी पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार के दावे पूरी तरह फैल है। जिले में आज भी कई ऐसे गांव है जंहा लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। लोगों को अब बारिश का इंतजार है। उनका कहना है कि अब वही उनकी समस्या दूर कर सकेगा










