प्रसूता की मौत पर डॉक्टर्स का कहना था कि इलाज में किसी तरह की कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई है. महिला को पहले से ही इंफेक्शन था, जिसके चलते उसका यूरिन पास नहीं हो रहा था. वहीं, डॉक्टर्स के काम के बहिष्कार पर इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टर्स का कहना है कि अगर मृतका के परिवार को कोई लड़ाई लड़नी है, तो वे कोर्ट में लड़ सकते हैं.
राजस्थान के सीकर में प्रसूता सुमन की मौत के बाद धरना दे रहे परिजनों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है. सहमति बनने के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया. मृतक के शव को श्री कल्याण अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया. सहमति के तहत निजी अस्पताल कानून तरीके से सही है या गलत इसके लिए परिजनों, प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की मौजूदगी में वीडियोग्राफी करवाई गई.
धरना दे रहे मुकुल खीचड़ ने बताया कि हमारी प्रशासन से वार्ता हुई है. इसमें सांसद अमराराम भी थे. वार्ता में हमारी मांग थी कि अस्पताल की वीडियोग्राफी कराई जाए. जो करवाई जा रही है और एक कमेटी का गठन किया गया है. साथ ही हमारी मांग थी कि प्रशासन की ओर से भी अधिकारी कमेटी में रहे. वह मांग भी हमारी मान ली है और कमेटी द्वारा 15 दिन में जांच रिपोर्ट दे दी जाएगी. हमारी मांग मानने के बाद हमने धरना समाप्त कर दिया है. .
मामले में पुलिस ने कही ये बात
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा ने बताया कि अस्पताल की मृतक के परिजनों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी कराई जा रही है और जिला कलेक्टर द्वारा एक जांच कमेटी बनाई गई है. इसमें प्रशासन के अधिकारी भी रहेंगे और पुलिस के अधिकारी भी रहेंगे, जो इस पूरे मामले की जांच करेगी. जल्द ही अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
क्या है मामला ?
दरअसल, दांतारामगढ़ के सूलियावास गांव की रहने वाली सुमन देवी 10 जून को बसंत विहार स्थित सरोज हॉस्पिटल में डिलीवरी के लिए भर्ती हुई थी. प्रसूता के पति अशोक साईं ने बताया कि उनकी पत्नी ने ऑपरेशन से दोपहर करीब सवा दो बजे एक बच्ची को जन्म दिया. डिलीवरी के बाद उसकी तबीयत खराब होने पर उसे जयपुर रैफर किया गया.
जहां बीते दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. प्रसूता की मौत होने के बाद परिजनों और ग्रामीण ने सीकर के सरोज अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर 50 लाख रुपए के मुआवजे और नवजात बच्ची की शिक्षा सहित आरोपी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया था. वहीं, डॉक्टर्स का कहना था कि इलाज में किसी तरह की कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई है. महिला को पहले से ही इंफेक्शन था, जिसके चलते उसका यूरिन पास नहीं हो रहा था.










