बारूद इकट्ठा करने के पीछे क्या मानसिकता थी एक करोड़पति कबाड़ी की….

25 अप्रैल को जबलपुर में हुए भीषण विस्फोट के जांच देश की सभी केंद्रीय एजेंसियां कर रही है। जांच में एनआईए,एनएसजी,आइबी,मिलिट्री एजेंसी सहित मध्यप्रदेश पुलिस भी लगी हुई है। वहीं जबलपुर पुलिस की टीम फरार मोहम्मद शमीम को तलाश करने में जुटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक घटना के चंद घंटे बाद ही शमीम जबलपुर से दिल्ली और फिर दुबई के रास्ते पाकिस्तान फरार हो गया है। शमीम के पाकिस्तान कनेक्शन सामने आने के बाद अब जांच सुरक्षा एजेंसी अलर्ट मोड में आ गई है। सूत्र यह भी बता रहे है कि जैसे ही इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती थी, यह फरारी काटने के लिए उन चिन्हित शहर की तरफ रुख करता था, जहां पर कि इसकी अच्छी जान पहचान होती थी। महज चंद सालों में ही मोहम्मद शमीम एक छोटे से कबाड़ी से उठकर करीब 50 करोड़ की संपत्ति का मालिक बन चुका था।

बमों के खोल से निकाला करता था बारूद

मोहम्मद शमीम कबाड़ी के खजरी-खिरिया स्थित जिस गोदाम में ब्लास्ट हुआ था, वहां पर बम के सेल कहां से आए थे, इसकी जांच में सुरक्षा एजेंसियां लगी हुई है, इस बीच जब आयुध निर्माणी खमरिया के अधिकारियों ने यह दावा किया है कि शमीम की गोदाम में मिलने वाले बमों के सेल ओएफके फैक्ट्री के नहीं है। ऐसे में अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच में एक और अड़चन यह आ गई है कि आखिर मोहम्मद शमीम के पास बम के सेल आए कहां से। पता चला है कि शमीम कबाड़ी के द्वारा बमों के खोल से गोदाम के भीतर बारूद निकाला जाता था। इसकी पुष्टि पुलिस की जांच में भी हुई है। लेकिन बमों से निकाले गए बारूद को वह रखता कहां पर था, इसका पुलिस अभी तक पता नहीं लगा पाई है। नेशनल सिक्युरिटी गार्ड और नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी टीम ने भी यह पता करने का प्रयास किया पर जब तक मोहम्मद शमीम पकड़ा नहीं जाता तब तक यह सभी के लिए पहेली बनी रहेगी। गोदाम में मिले बमों के खोल की जांच की गई तो पता चला कि ये सेल छह से सात साल पुराने है। फिलहाल सभी के सामने अभी ये सवाल है कि शमीम इन बमों को आखिर क्यों इकट्ठा कर रखा था।

पांच साल में बन गया करोड़पति

जबलपुर के अधारताल आनंद नगर का रहने वाला मोहम्मद शमीम आज से पांच साल तक छोटा-मोटा कबाड़ी था। अचानक ही इसके काम में तेजी आ गई। देखते ही देखते इस ने करोड़ रुपए की संपत्ति शहर के अलग-अलग स्थानों में बना ली। 2018 में मोहम्मद शमीम और मोहम्मद शमीम वल्द मोहम्मद बशीर पर 10 लाख रुपए कीमत का 43 मीट्रिक टन रेलवे का लोहा चोरी करने के आरोप में आरपीएफ ने इसे पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद इसकी गोदामों से चोरी में इस्तेमाल चार ट्रकों और टाटा सफारी की जब्ती भी की गई थी। शमीम चोरी का माल छिपाने के लिए जबलपुर और सागर के कई गोदामों का उपयोग करता था और वहीं पर माल भेजा करता था। जबलपुर और सागर के विभिन्न थानों में शमीम के खिलाफ केस दर्ज हैं। वह चोरी का लोहा रायपुर, भोपाल और इंदौर की विभिन्न फैक्ट्री में भेजा करता था, इसका भी खुलासा आरपीएफ पुलिस ने जांच के दौरान किया था। बताया यह भी जाता है कि यह एक संगठित गिरोह चलाता है। पुलिस-प्रशासन फरार शमीम और उसके बेटे की संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में लगी हुई है। शमीम और उसके बेटे ने कबाड़ की कमाई से शहर में कई संपत्तियां खरीदी और बचने के लिए परिचितों और करीबियों के नाम कर दी। बताया यह भी जा रहा है कि जिन लग्जरी गाडियों में शमीम और उसका परिवार घूमता था, वह साथ में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं।

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