6 बागी विधायकों के मामले पर सुनवाई 12 मार्च को

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के 6 बागियों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला 12 मार्च (मंगलवार) को सुनवाई के लिए लगा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से किसी भी तरह का निर्णय आने से प्रदेश की सियासत करवट बदलेगी। प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों में इस निर्णय के आने से पहले बेचैनी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अंतरिम आदेश आने से पहले सरकार ने कैविएट याचिका फाइल की है ताकि उनका पक्ष सुना जा सके। सूत्रों के अनुसार यह मामला कोर्ट नंबर-2 में केस नंबर डब्ल्यू.पी.(सी.) नंबर 156/2024 चैतन्य शर्मा एंड अदर वर्सिज/स्पीकर एच.पी. के नाम से आइटम नंबर-36 पर लिस्टिड है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने गत 29 फरवरी को कांग्रेस पार्टी के 6 बागी विधायकों सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, इंद्रदत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, देवेंद्र भुट्टो और चैतन्य शर्मा की सदस्यता को पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर समाप्त कर दिया था। हिमाचल विधानसभा के इतिहास में पहली बार इस तरह का निर्णय विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से सुनाया गया है। इसके बाद बागियों की तरफ से इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ सियासी घमासान
हिमाचल प्रदेश में गत 27 फरवरी को राज्यसभा चुनाव से सियासी घमासान शुरू हुआ। इसमें सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और विपक्षी भाजपा ने पूर्व मंत्री हर्ष महाजन को प्रत्याशी बनाया था। चुनाव में कांग्रेस के 6 बागी विधायकों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था, उनको 3 निर्दलीय विधायकों के वोट भी मिले। इस कारण बाजी 34-34 से ड्रा हो गई तथा बाद में लॉटरी से भाजपा के हर्ष महाजन विजयी घोषित हुए।

पहले पंचकूला बाद में उत्तराखंड शिफ्ट हुए बागी
राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के 6 बागी और 3 निर्दलीय विधायक सी.आर.पी.एफ. सुरक्षा घेरे के बीच पंचकूला ले जाए गए। इसी सियासी घटनाक्रम के बीच लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पहले इस्तीफे की पेशकश की तथा बाद में उसे वापस ले लिया। विक्रमादित्य सिंह दिल्ली जाते समय पंचकूला में बागियों से भी मिले। बाद में बागी पंचकूला से 8 मार्च को उत्तराखंड के लिए शिफ्ट हुए। उत्तराखंड में उनको ऋषिकेश के नजदीक सिंगटाली स्थित होटल में सी.आर.पी.एफ. एवं उत्तराखंड पुलिस की वाई श्रेणी की सुरक्षा में रखा गया है।

मुख्यमंत्री व बागियों के बीच चलते रहे शब्दबाण
मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और बागी विधायकों के बीच शब्दबाण चलते रहे। मुख्यमंत्री ने बागियों के लिए काला नाग और उनको गडरिए की भेड़ों की तरह हांकने जैसे शब्दों का प्रयोग किया। बागियों ने भी मुख्यमंत्री पर सवालों की बौछार की तथा उनके हिमाचल भवन में रुकने की बजाय फाइव स्टार होटल में रुकने जैसे विषयों को उठाया।

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