हफ्ते में एक दिन भारी-भरकम बैग का झंझट होगा खत्म, खाली हाथ स्कूल जाएंगे बच्चे

स्कूलों में पढऩे जाने वाले बच्चों की पीठ पर बैग का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। हंसने-खेलने की उम्र में उनकी पीठ पर किताबों व कापियों का इतना बोझ होता है कि वह लाचार नजर आते हैं। अब इसी बोझ को कम करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूल बैग पॉलिसी-2022 को लेकर आदेश जारी किया है और इसे सख्ती से पालन करने के भी निर्देश दिए हैं।

दरअसल राज्य शिक्षा विभाग ने स्कूल बैग पॉलिसी-2022 जारी कर दी है, जिसके तहत अब स्कूलों में हफ्ते में एक दिन नो बैग डे रहेगा। इसके अलावा दूसरी कक्षा तक के छात्रों को अब कोई होमवर्क नहीं दिया जाएगा। इस पॉलिसी में कक्षा एक से लेकर 12 वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए बैग के वजन की सीमा तय कर दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है।

बता दें कि कई सालों से ये मुद्दा उठ रहा है कि बच्चों के स्कूल बैग का वजन लगातार बढ़ रहा है, जिस पर ज्यादा गौर नहीं किया जा रहा है। साल 2022 में ही स्कूलों को निर्देश जारी किया गया था लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी सर्कुलर में पहली कक्षा से 10वीं कक्षा तक के बच्चों के बैग का वजन तय किया गया था।

पॉलिसी में कहा गया है कि स्कूल बैग का वजन बच्चे के वजन का 10 फीसदी के आसपास होना चाहिए। पहली व दूसरी के बच्चों के लिए बैग का वजन 1.5 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। तीसरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए 2 से 3 किलोग्राम, छठी व सातवीं कक्षा के बच्चों के लिए 4 किलोग्राम, आठवीं व नौवीं कक्षा के बच्चों के लिए 4.5 किलोग्राम और 10वीं कक्षा के बच्चों के लिए बस्ते का वजन 5 किलोग्राम तय किया गया है। लेकिन प्राइवेट स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के बैग इससे कहीं ज्यादा भारी हैं।

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