भारतीय महिलाओं में बढ़ रहा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा, यहां जानिए कारण और बचाव


प्रेगनेंसी भारतीय महिलाओं के लिए आसान नहीं होती है। ये तो सब जानते हैं कि इस दौरान महिलाओं को मूड स्विंग्स, बदन दर्द, थकान जैसी कई समस्याएं होती हैं। वहीं एक स्टडी की मानें तो हर दिन इससे करीब 66 महिलाओं की मौत हो रही है। भारत, नाइजीरिया के बाद दूसरा ऐसा देश है, जहां इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की मौत हो रही है। एक स्टडी में 24,000 महिलाओं की प्रेगेंसी में हाई रिस्क फैक्टर पाया गया है।

यहां पर महिलाओं को प्रेग्नेंसी में होता है हाई रिस्क फैक्टर

इस डेटा से ये बात पता चली है कि लगभग 33% प्रेग्नेंट महिलाएं में एक हाई रिस्क फैक्टर से गुजरती हैं, जबकि 16% में कई सारे हाई रिस्क फैक्टर थे। पूर्वोत्तर राज्य (Northeastern States ) मेघालय (67.8%), मणिपुर (66.7%) और मिजोरम (62.5%) और दक्षिणी राज्य तेलंगाना (60.3%) में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई सारे हाई लेवल रिस्क झेलना पड़ता है, वहीं बात करें सिक्किम (33.3%), ओडिशा में (37.3%) और छत्तीसगढ़ (38.1%) की तो यहां प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं इतना हाई रिस्क नहीं झेलती हैं।

किस तरह के रिस्क से गुजरती हैं प्रेग्नेंट महिलाएं

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी यानी माँ और बच्चे से जुड़ी सेहत संबंधी समस्याओं का होना। यह रिस्क कई तरह के हो सकती हैं, जैसे- बच्चे का विकास धीमी गति से होना, समय से पहले लेबर पेन (प्रसव पीड़ा), खून ना बनना, मिसकैरेज, शिशु में जन्मजात हार्ट प्रॉब्लम या कोई और विकार हो सकता है। वहीं प्रेग्नेंट महिला के जीवन को भी जोखिम रहता है, प्रसव से संबंधित जटिलताएं, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और सेप्सिस ( ठंड लगना और कमजोरी महसूस करना) जैसी समस्याएं तो होती है। कई सारे केस में तो महिलाओं की जान भी चली जाती है।

ऐसी महिलाओं को रहता है प्रेग्नेंसी में हाई रिस्क
-19 साल से कम और 35 साल से ज्यादा की महिला का प्रेग्नेंट होना जोखिम भरा होता है।

– प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट का ध्यान न रखना, तंबाकू, नशीली दवाओं और धूम्रपान का सेवन, खराब जीवनशैली से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा बढ़ जाता है।

-प्रेग्रेंसी में हाई ब्लड प्रेशर, किडनी संबंधी रोग, मोटापा, एचआईवी, कैंसर जैसी बीमारियां हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का कारण बनती हैं।

गर्भ में जुड़वा बच्चों का होना भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का कारण बन सकता है।

– अगर प्रेग्नेंट महिला के ब्लड में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात ग्राम से कम हो तो हाई रिस्क डिलीवरी होने का खतरा रहता है।

प्रेग्नेंसी में हाई रिस्क होने पर दिखते हैं ऐसे लक्षण
– लगातार तेज बुखार
-सिरदर्द
– सांस लेने में तकलीफ
– पेट में दर्द
– भ्रूण के हिलने-डुलने में कमी
– पेट के अल्सर
– त्वचा पर दाने
– सूजन
– वजन बढ़ना

सबसे पहले तो प्रेग्रेंसी में हर महीने डॉक्टर से चेकअप करवाते रहें। उनसे डाइट की सलाह लें। इस दौरान धूम्रपान, तंबाकू, शराब के सेवन से बचें। शरीर को भरपूर आराम दें। हल्का- फुल्का व्यायाम या सुबह- शाम को सैर करें।

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