पीएम मोदी इस्लामिक देश यूएई के लिए कैसे बने ख़ास

पिछले महीने ही यूएई के राष्ट्रपति गुजरात वाइब्रेंट समिट में गांधीनगर आए थे

पिछले महीने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में नए राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी.

अब 14 फ़रवरी को पीएम मोदी अबूधाबी में एक मंदिर का उद्घाटन करने जा रहे हैं.

संयुक्त अरब अमीरात में यह मंदिर 27 एकड़ ज़मीन पर बनकर तैयार हुआ है.

यह ज़मीन यूएई के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाह्यान ने लीज़ पर दी है. चुनावी साल में नरेंद्र मोदी के लिए यह अहम इवेंट है.

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद सातवीं बार यूएई जा रहे हैं.

साल 2015 में 16 अगस्त को नरेंद्र मोदी ने पीएम के रूप में यूएई का जब पहला दौरा किया था, तो यह भारत के किसी भी प्रधानमंत्री का 34 साल बाद हुआ दौरा था.

पीएम मोदी से पहले इंदिरा गांधी 1981 में यूएई गई थीं.

इस दौरे में पीएम मोदी यूएई के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ी है.

पीएम मोदी यूएई के प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से भी मुलाक़ात करेंगे.

मंगलवार की शाम पीएम मोदी अबूधाबी के ज़ायेद स्पोर्ट्स सिटी स्टेडियम में क़रीब 60 हज़ार भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे. इस कार्यक्रम को ‘अहलन मोदी’ नाम दिया गया है. अहलन अरबी का शब्द है जिसका मतलब स्वागत होता है.

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 60 हज़ार लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है.

ख़लीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ आयोजकों को रजिस्ट्रेशन बंद करना पड़ा क्योंकि लोगों की संख्या बढ़ती जा रही थी.

यूएई को लेकर मोदी की रणनीति

बुधवार को पीएम मोदी दुबई में वर्ल्ड गर्वनमेंट समिट 2024 में शामिल होंगे.

इस समिट में भारत के अलावा तुर्की और क़तर को भी बुलाया गया है. इसी दिन शाम में मोदी अबू मुरेइखा में हिन्दू मंदिर का उद्घाटन करेंगे.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई भारत में 50 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर सकता है.

पिछले महीने ही यूएई के राष्ट्रपति गुजरात आए थे और वह पीएम मोदी के साथ एक रोड शो में भी शामिल हुए थे. कहा जा रहा है कि मोदी के इस दौरे में धर्म, राजनीति और निवेश तीनों शामिल हैं.

भारत में यूएई के राजदूत अब्दुलनासेर अलशाली ने पीएम मोदी के मंदिर उद्घाटन करने आने पर इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ”यूएई पीएम मोदी के इस दौरे को सहिष्णुता और स्वीकार्यता के मूल्यों से जोड़कर देखता है. यही मूल्य हमारे द्विपक्षीय संबंधों को राह दिखाते हैं.”

इस्लाम यूएई का राजकीय धर्म है. दूसरी तरफ़, नरेंद्र मोदी मोदी के शासन में भारत के मुसलमानों के प्रति बर्ताव को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

इसके बावजूद भारत और यूएई के संबंध इन विवादों से परे हाल के वर्षों में और गहरे हुए हैं.

कहा जा रहा है कि भारत की बढ़ती जियोपॉलिटिकल अहमियत और अर्थव्यवस्था की तेज़ वृद्धि दर के कारण यूएई भारत को बहुत महत्व दे रहा है.

यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाह्यान को पीएम मोदी अपना भाई बताते हैं. यूएई ने पीएम मोदी को 2019 में अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ज़ायेद’ से भी सम्मानित किया था.

यूएई में जिस मंदिर का उद्घाटन पीएम मोदी करने जा रहे हैं, उसके मुख्य पुजारी ब्रह्माविहारीदास स्वामी ने कहा है कि दोनों देशों के संबंध इससे पहले इतने मज़बूत कभी नहीं रहे.

मोदी की छवि

मोदी की हिंदुत्ववादी छवि इस्लामिक देशों से संबंधों के मामले में आड़े क्यों नहीं आई?

सऊदी अरब समेत खाड़ी के कई देशों में भारत के राजदूत रहे तलमीज़ अहमद से यही सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, ”यूएई में वहाँ के मूल नागरिकों की कुल आबादी महज़ 10 से 12 फ़ीसदी है. बाक़ी प्रवासियों की आबादी है. ऐसे में वहाँ के लोगों का कोई दबाव नहीं रहता है.”

अहमद कहते हैं, ”बहुसंख्यक जनभावना का दोहन भारत की विदेश नीति में भी किया जाता है. ख़ास कर अब यह चलन बढ़ा है लेकिन यूएई में ऐसी कोई मजबूरी नहीं है. वहाँ राजशाही व्यवस्था है और यह व्यवस्था विदेश नीति में अपना हित सर्वोपरि रखती है. भारत की घरेलू राजनीति में क्या हो रहा है, इससे यूएई को कोई मतलब नहीं है. उसे मतलब है ट्रेड से.”

यूएई की आबादी अभी क़रीब एक करोड़ है. इसमें प्रवासी और वहाँ के मूल नागरिक दोनों शामिल हैं. इस एक करोड़ में क़रीब 10 लाख लोग ही वहाँ के नागरिक हैं.

बाक़ी क़रीब 200 देशों के प्रवासी हैं. प्रवासियों का सबसे बड़ा समूह भारत का है. यहाँ क़रीब 35 लाख भारतीय रहते हैं. यानी यूएई की कुल आबादी में एक तिहाई भारतीय हैं

यूएई को भारत क्यों पसंद है?
तलमीज़ अहमद कहते हैं, ”1981 में इंदिरा गांधी ने यूएई का दौरा किया था. लेकिन वह शीत युद्ध का ज़माना था. भारत ने शीत युद्ध में ख़ुद को किसी भी गुट में नहीं रखा था. ऐसे में भारत के लिए विदेश नीति भी मुश्किल थी. तब इंदिरा गांधी को बहुत सफलता नहीं मिली थी. नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से आठवीं बार यूएई जा रहे हैं. अब दुनिया भी बदल चुकी है. दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक रूप से अच्छे हैं. हम मोदी साहब को इसका श्रेय तो दे ही सकते हैं.”

नरेंद्र मोदी हिन्दुत्व की राजनीति के झंडाबरदार हैं. क्या यह छवि खाड़ी के इस्लामिक देशों में उनके लिए मुश्किलें पैदा नहीं करती हैं?

तलमीज़ अहमद कहते हैं, ”पूरी दुनिया में उथल-पुथल है. जिन मूल्यों की बात पश्चिम करता था, उसी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मानवाधिकारों और सेक्युलर मूल्यों की वकालत करने वाला पश्चिम ख़ुद ही कठघरे में है. ऐसे में हम यह नहीं सोच सकते हैं कि खाड़ी के देश भारत से आर्थिक फ़ायदे के संबंध बनाने के बजाय यहां की घरेलू राजनीति पर ध्यान देंगे. यूएई ने इसराइल को मान्यता दी और राजनयिक संबंध क़ायम किया. इसके ख़िलाफ़ यूएई के भीतर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. ज़ाहिर है कि यूएई की दस फ़ीसदी आबादी इसे लेकर कुछ कर भी नहीं सकती है.”

थिंक टैंक कार्नेगी एन्डाउन्मेंट से अबूधाबी में पश्चिम के एक पूर्व राजदूत ने कहा था कि मोदी का व्यावहारिक राजनीति वाला माइंडसेट और एक मज़बूत नेता वाली शैली सऊदी और यूएई के दोनों प्रिंस पसंद करते हैं.

हिन्दुत्व की छवि
थिंक टैंक कार्नेगी एन्डाउन्मेंट ने अगस्त 2019 की अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था, ”शुरुआत में ऐसा लगा था कि नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि अरब प्रायद्वीप से संबंधों को आगे बढ़ाने में आड़े आएगी. मोदी हिन्दू राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक हैं. 2002 के गुजरात दंगों के बाद मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित हुई थी. इस दंगे में सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम मारे गए थे.”

”लेकिन खाड़ी के देशों के नेताओं और ख़ासकर सऊदी अरब के साथ यूएई ने मोदी को इस रूप में नहीं देखा. पॉलिटिकल इस्लाम के समाधान में मोदी का सुरक्षा से जुड़ा दृष्टिकोण दोनों देशों के शासकों के विचारों से मेल खाता था. फ़रवरी 2019 में नई दिल्ली में एक समारोह में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने नरेंद्र मोदी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताया था.”

पिछले साल सितंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल पूछा गया था कि मोदी सरकार अपनी हिंदुत्व की पहचान को लेकर मुखर है, इसके बावजूद सऊदी अरब, यूएई और मिस्र जैसे देश जो पाकिस्तान के क़रीबी माने जाते थे, उन्हें अपने क़रीब लाने में सफल कैसे रही है, ये कैसे हुआ?

इसके जवाब में जयशंकर ने कहा था, ”ये इस्लामिक देश मोदी सरकार को सही मायने में भारतीय की तरह देखते हैं. वे हमें अपनी संस्कृति और मान्यताओं से जुड़े हुए देखते हैं और इस पर गर्व करते हैं. उनके लिए हम जो दिखते हैं वहीं हैं. खाड़ी देशों में ये बातें हमारे लिए सम्मान पैदा करती हैं. वो जो ख़ुद हैं, उन्हें उस पर गर्व है, तो वो जब मोदी के नेतृत्व में भारत को देखते हैं, जिसे भारत होने पर गर्व है, तो वो इससे जुड़ाव महसूस कर पाते हैं.”

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