मध्य प्रदेश शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 2013 बैच के अनुभवी आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा को सीधी जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया है। यह निर्णय निवर्तमान कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाए जाने के तत्काल बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लिया गया है। विकास मिश्रा अपनी कार्यशैली में संवेदनशीलता और त्वरित परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं। विशेष रूप से डिंडोरी कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल देशभर में चर्चा का विषय रहा था, जहां उनके काम करने के अंदाज ने जनता के बीच गहरी पैठ बनाई थी।
उनके कार्यकाल के कुछ प्रसंग आज भी प्रशासनिक हलकों में मिसाल के तौर पर देखे जाते हैं। डिंडोरी में नर्मदा तट के निरीक्षण के दौरान जब एक निर्धन बैगा आदिवासी महिला ने सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने की व्यथा सुनाई, तो उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए महिला की हथेली पर अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर लिख दिया और आश्वासन दिया कि काम न होने पर वे सीधे उनसे संपर्क करें। इसी तरह, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए उन्होंने एक महिला से रिश्वत मांगे जाने की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की और संबंधित अधिकारी को मौके पर ही पैसे वापस करने के सख्त निर्देश दिए थे।
सीधी जिले में प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा स्वयं जमीनी फीडबैक लेने के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है। विकास मिश्रा को मंत्रालय से हटाकर सीधी की कमान सौंपना स्पष्ट करता है कि सरकार क्षेत्र में एक ऐसे जनहितैषी अधिकारी को चाहती है जो फाइलों के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर समस्याओं का निराकरण कर सके। मुख्यमंत्री का यह फैसला अधिकारियों को जवाबदेही का कड़ा संदेश देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियुक्ति से पूर्व विकास मिश्रा मुख्यमंत्री के अपर सचिव और आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।










