कांग्रेस में आज 5 पावर सेंटर… पार्टी से इस्तीफा देकर संजय निरुपम ने गिनाए ये नाम

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र के दिग्गज नेता संजय निरुपम ने पार्टी छोड़ने के बाद कहा, बची-खुची शिवसेना के नेता (उद्धव ठाकरे) दो दिन पहले दिल्ली गए थे और वहां बीजेपी को भ्रष्ट जनता पार्टी कहा था. अगर वो सोचते हैं तो फिर भ्रष्टाचारी  को हमारी सीट पर टिकट क्यों दिया. उन्होंने कहा, मेरे क्षेत्र से खिचड़ी चोर को उम्मीदवार बना दिया है.

लोकसभा चुनाव प्रचार के बीच कांग्रेस छोड़ने वाले महाराष्ट्र के दिग्गज नेता संजय निरूपम ने गुरुवार को गांधी परिवार पर जबरदस्त हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में पांच पावरसेंटर बन गए हैं. इनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का नाम शामिल है. उन्होंने  कहा कि कांग्रेस पार्टी वैचारिक रूप से बिखर गई है और दिशाहीन हो गई है. कांग्रेस पार्टी में इस समय टकराव चल रहा है. उन्होंने कहा, गांधी  के सेक्युलरिज्म को नेहरू ने एडॉप्ट किया और नेहरू की धर्मनिरपेक्षता से धर्म ही गायब है. कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए थे.

संजय निरुपम ने कहा, बची-खुची शिवसेना के नेता (उद्धव ठाकरे) दो दिन पहले दिल्ली गए थे और वहां बीजेपी को भ्रष्ट जनता पार्टी कहा था अगर वो सोचते हैं तो फिर भ्रष्टाचारी को हमारी सीट पर टिकट क्यों दिया. उन्होंने कहा, मेरे क्षेत्र से खिचड़ी चोर को उम्मीदवार बना दिया है. बता दें कि उद्धव गुट ने मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से अमोल कीर्तिकर को उम्मीदवार घोषित किया है. ED ने COVID ​​खिचड़ी घोटाले के संबंध में अमोल कीर्तिकर को समन जारी किया है.

 

‘पहले कांग्रेस में एक पावर सेंटर था’

उन्होंने कहा, अब सवाल उठता है कि कांग्रेस ऐसा क्यों कर रही है. दरअसल, कांग्रेस आज बिखरी हुई पार्टी है. वैचारिक तौर पर दिशाहीन तो सब बता ही रहे हैं. पहले एक पावर सेंटर हुआ करता था. बाकी उसके दरबारी होते थे. आज कांग्रेस में पांच पावर सेंटर हैं और इनकी अपनी लॉबी और कोकस हैं. आज आपस में टकराव होते रहते हैं. इसमें मेरे जैसे आम कार्यकर्ता तकलीफ में रहते हैं.

‘कांग्रेस की लॉबियों में आपस में टकराव’

निरुपम ने कहा, आज कांग्रेस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल एक पावर सेंटर बन गए हैं. खड़गे के करीबियों के पास कोई अनुभव नहीं है और बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. वो अचानक करीब आकर गलत बातें बोलते हैं.  वेणुगोपाल क्या बोलते हैं, किसी को समझ में नहीं आता है. कांग्रेस में लॉबियों के बीच टकराव चल रहा है. कांग्रेस में नेताओं की परेशानी बढ़ती जा रही है अंतत: मेरा धैर्य टूटा और आज आपके सामने बैठे हैं. कार्यकर्ताओं में निराशा गहराती जा रही है. कांग्रेस बार-बार कहती है कि हम धर्म निरपेक्ष  पार्टी हैं. कांग्रेस को गांधी जी लेकर आए थे.

‘कांग्रेस ने राम को ही नकार दिया था’

संजय निरुपम ने कहा, गांधी जी के सेक्युलरिज्म में किसी धर्म का विरोध नहीं है. इसे नेहरू ने एडॉप्ट किया. लेकिन उनके सेक्युलरिज्म में धर्म का ही विरोध है और धीरे-धीरे ये लोगों की नसों में चला गया. लेकिन सारी विचारधाराओं की एक लिमिट होती है और बाद में वो खत्म हो जाती है. कांग्रेस के अंदर धार्मिक होने का विरोध किया जाता है और कांग्रेस धर्म को मानने को तैयार नहीं है. कांग्रेस आलाकमान राम लला विराजमान  का ही विरोध करने पर उतर आए. किसी ने आयोजन उत्सव पर सवाल नहीं उठाए. लेकिन कांग्रेस ने इसे बीजेपी का प्रचार बताकर राम के प्रति  आस्था को ही नकार दिया. तीन चार दिन तक उस पर पार्टी प्रवक्ता जवाब देते रहे. आज हालात ये है कि हिंदुस्तान पूरी तरह धार्मिक हो गया है.  आज हर कोई मंदिर गर्व से जाता है. पहले मंदिर जाने से स्टार भी कतराते थे.

महाराष्ट्र कांग्रेस में चल रहा है उठापटक का तूफान

महाराष्ट्र कांग्रेस में उठा-पटक का तूफान थमता नहीं दिख रहा है. कांग्रेस ने पार्टी विरोधी बयानबाजी पर संजय निरुपम 6 साल के लिए बाहर कर दिया है. जबकि निरुपम ने कहा- मैंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उसके बाद पार्टी ने सस्पेंड करने का प्रेस नोट जारी किया. इससे पहले महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण और मिलिंद देवड़ा ने भी साथ का साथ छोड़ा था. निरुपम लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे हैं. उन्होंने लोकसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के बीच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था. उसके बाद कांग्रेस ने पहले स्टार कैंपनर्स की लिस्ट से बाहर किया, फिर से पार्टी से निकाल दिया. निरुपम ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे गए अपने इस्तीफे के मेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया और एक्स पर लिखा, ऐसा लगता है कि पार्टी ने कल रात मेरा इस्तीफा मिलने के तुरंत बाद निष्कासन लेटर जारी करने का फैसला किया. इतनी तत्परता देखकर अच्छा लगा.

कांग्रेस के खिलाफ खोल दिया था मोर्चा

निरुपम मुंबई उत्तर से सांसद रहे हैं, लेकिन इस बार वो मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से दावेदारी कर रहे थे. इस बीच, उद्धव ठाकरे गुट ने एकतरफा फैसला लिया और मुंबई की छह लोकसभा सीटों में से चार पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए, जिसमें मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट भी शामिल थी. इस बात से निरुपम खफा हो गए. उन्होंने पहले भी सीट बंटवारे में उद्धव गुट के हावी होने पर नाराजगी जताई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में निरुपम मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से बीजेपी के गोपाल शेट्टी से हार गए थे

 

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