सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कोतमा अनूपपुर जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जहाँ एक ओर दानवीर महेंद्र गोयनका जी द्वारा अस्पताल की बेहतरी के लिए दिए गए 21 लाख रुपये के ‘पुण्य कोष’ पर भ्रष्टाचार की डकैती डाली गई, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में एक पत्रकार के पिता को तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवानी पड़ी। इस ‘संस्थागत हत्या’ और भारी वित्तीय अनियमितता के खिलाफ अब भारत आदिवासी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष अंकिता सिंह परस्ते और स्थानीय निवासी ऋषि तिवारी ने न्याय की मशाल थाम ली है।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ीं संवेदनाएं
अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि लाखों रुपये की राशि कागजों पर खर्च कर दी गई, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है। स्थानीय निवासी ऋषि तिवारी ने प्रशासन पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि, “जब अस्पताल के पास लाखों का फंड था, तो एक मरीज को दवा और सही इलाज के लिए क्यों तड़पना पड़ा ? क्यों डॉक्टर को मजबूरन जमीन पर बैठकर अनुपयुक्त तरीके से सीपीआर (CPR) देना पड़ा ? यह भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या है?”
अंकिता सिंह परस्ते का ‘निलंबन’ अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए अंकिता सिंह परस्ते ने जिला प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में दोषी बीएमओ (BMO) के तत्काल निलंबन की मांग की है। अंकिता सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि, “गरीबों और आदिवासियों के हक के पैसे को डकारने वाले अधिकारियों को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यदि 72 घंटों के भीतर निलंबन की कार्यवाही नहीं हुई, तो अनूपपुर कलेक्ट्रेट का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा।”
प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल
स्थानीय जनता में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि इतने बड़े घोटाले और एक मासूम जान जाने के बावजूद अनूपपुर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग मौन क्यों है? क्या दोषी अधिकारियों को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है?
जाँच के घेरे में ‘फर्जी बिलिंग’ का खेल
सूत्रों के अनुसार, दान राशि को खपाने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग की गई है। अंकिता सिंह और ऋषि तिवारी ने मांग की है कि बीएमओ को पद से हटाकर लोकायुक्त जाँच कराई जाए।
पत्रकार के पिता की मृत्यु के लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही हो।
अस्पताल की रोगी कल्याण समिति के खर्चों का पब्लिक ऑडिट हो।
कोतमा की जनता अब आर-पार के मूड में है। अंकिता सिंह परस्ते और ऋषि तिवारी के नेतृत्व में आंदोलन की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन भ्रष्टाचार की ढाल बनता है या पीड़ित परिवार और जनता को न्याय दिलाता है।











