वैभव सूर्यवंशी को ना खिलाने के पीछे क्या गौतम गंभीर की ज़िद थी, या श्रेयश अय्यर का……

भारतीय क्रिकेट टीम ने इसी साल T-20 विश्व कप जीता था। श्रेयस अय्यर इस टीम में नही थे और ना ही विश्व कप के बाद हुए T-20 अंतराष्ट्रीय मैचों में भारतीय टीम का हिस्सा थे।

अभी श्रेयस अय्यर T-20 के कैप्टन हैं … किस आधार पर ?
जाहिर है.. IPL के आधार पर !

प्रिंस यादव ने T-20 में डेब्यू किया है … किस आधार पर ? वही .. IPL के आधार पर !

सूर्यांश शेडगे ने भी आज भारतीय टीम में पदार्पण किया … किस आधार पर ? IPL में गुजरात के खिलाफ प्रेशर में 67 रन की एक पारी और इंडिया -A की श्रीलंका में हुई ट्राय सीरीज में 72 रन की एक बढ़िया पारी खेलने के आधार पर !

इनके अलावा जितने खिलाड़ी आज ग्यारह में खेल रहे हैं उनमें से सिर्फ ईशान किशन ने ही IPL में जोरदार फार्म दिखाया था बाकि सारे एवरेज रहे .. अभिषेक शर्मा , संजू सैमसन , तिलक वर्मा , अक्षर पटेल , शिवम दुबे , अर्शदीप सिंह , हर्षित राणा सहित सारे एवरेज रहे।

अब मैनेजमेंट बोल सकता हैं कि जो IPL में एवरेज रहे उन्होंने T-20 विश्व कप जिताया हैं इसलिये वो तो टीम में रहेंगे ही !

तो फिर अय्यर , प्रिंस यादव और शेडगे को जिस बेस पर खिलाया उसी बेस पर वैभव सूर्यवंशी को क्यूँ नही खिलाया ? वो अय्यर से अच्छा खेला , उसने प्रिंस यादव से ज्यादा प्रभावित किया , उसने शेडगे से ज्यादा बड़ी और विध्वंसक पारियां IPL में खेली , उसने इंडिया -आ को ट्राय सीरीज का फायनल 94(29) रन मारकर जिताया !

जब सचिन तेंडुलकर को 1989 के पाकिस्तान दौरे पर लेकर गये तो पहले टेस्ट से कमेंट्री सुनी थी सिर्फ सचिन के लिये। इसका मतलब ये नही कि श्रीकांत , रवि शास्त्री , अजहर , कपिल देव का महत्व कम हो गया था। एक खिलाड़ी अपने अद्भुत टैलेंट से उस जगह पहूँचा था तो सारे देश को उत्सुकता थी उसका प्रदर्शन देखने की। वैभव सूर्यवंशी भी सचिन की तरह अद्भुत प्रतिभा हैं।

अच्छा हुआ उस समय गौतम गंभीर जैसा कोच नही था .. नही तो सचिन भी अमोल मजूमदार बन गया होता।

फैंस का कहना है:- स्पेशल खिलाड़ी को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलना ही चाहिये बाकि सारे लॉजिक गये चूल्हे में। 

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