मध्यप्रदेश कांग्रेस में वर्षों पुराना राजनीतिक घाव एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिया। इंदौर के गांधी भवन में आयोजित कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल जी ने ऐसा बयान दिया जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी।
कार्यक्रम के दौरान जब शहर कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष प्रवेश यादव जी की ओर से सवाल उठा कि यदि भविष्य में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या पार्टी छोड़कर गए नेताओं की वापसी होगी, तब अजय सिंह ने बिना लाग-लपेट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद कांग्रेस को किसी “गद्दार” की जरूरत नहीं होगी। हालांकि चुनावी परिस्थितियों में कुछ नेताओं की वापसी पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन माहौल तब और गर्म हो गया जब सवाल सीधे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की संभावित वापसी पर पहुंचा। इस पर अजय सिंह ने दो टूक कहा – “अगर सिंधिया कांग्रेस में वापस आते हैं, तो हम उन्हें नहीं लेंगे… और अगर इसके बाद भी उन्हें पार्टी में लिया जाता है, तो मैं कांग्रेस छोड़ दूंगा। उनके इस बयान को मंच पर मौजूद कांग्रेस के सीनियर नेता केके मिश्रा जी ने भी समर्थन दिया, जिसके बाद कार्यक्रम राजनीतिक संदेशों का केंद्र बन गया।
दरअसल, मार्च 2020 में सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। उनके साथ कई विधायकों के जाने से कमल नाथ सरकार अल्पमत में आ गई और सत्ता परिवर्तन का रास्ता खुला। उस घटनाक्रम की राजनीतिक टीस अब भी कांग्रेस के भीतर पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही।
अजय सिंह राहुल का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि कांग्रेस के उस वर्ग की भावना माना जा रहा है जो अब भी 2020 की राजनीतिक टूट को पार्टी के सबसे बड़े झटकों में गिनता है। अब देखना होगा कि यह बयान केवल मंच तक सीमित रहता है या आने वाले समय में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बहस को जन्म देता है।










