मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का 13 अप्रैल दिन सोमवार को श्री नर्मदे हर सेवा न्यास अमरकंटक के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय भगवत शरण माथुर जी के जयंती अवसर पर विचार गोष्ठी (विषय पंच परिवर्तन) कार्यक्रम के अवसर पर अमरकंटक आगमन हुआ, इस दौरान पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें कोयलांचल क्षेत्र गोविंदा (जमुना- कोतमा) की बाल कथा वाचक प्रसिद्ध भजन गायिका 12 वर्षीय उन्नति मिश्रा द्वारा भजन गायन एवं मोटिवेशनल स्पीच प्रस्तुत किया,उनके मधुर भजनों एवं मोटिवेशनल स्पीच ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया,पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के कार्यक्रम में उपस्थित होने के पूर्व लगभग 3 घंटे चले सांस्कृतिक कार्यक्रम में
स्व. भगवत शरण माथुर जी की जयंती एवं “पंच परिवर्तन” विचार गोष्ठी के अवसर पर बाल कथावाचक उन्नति किशोरी ने कार्यक्रम के दौरान भगवत शरण माथुर जी के जीवन शैली पर भी प्रकाश डाला और कहा कि केवल औपचारिक नहीं, वैचारिक भी आज हम केवल एक कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हैं,हम एक विचार-यज्ञ में सहभागी हुए हैं।
हम सब इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी का हृदय से स्वागत करते हैं,आपकी उपस्थिति यह संकेत देती है कि सत्ता और संस्कार जब साथ चलते हैं, तभी राष्ट्र का उत्थान होता है।
भगवत शरण माथुर जी एक व्यक्ति नहीं, एक चेतना हैं,आज हम जिस महान विभूति को स्मरण कर रहे है
स्वर्गीय माथुर जी
ये केवल नाम नहीं,
ये राष्ट्रधर्म की जीवंत व्याख्या थे।
उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि “व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा होता है”
“सुविधा नहीं, समर्पण महान होता है”।
उनका जीवन त्याग, तपस्या और अनुशासन का ऐसा उदाहरण है,
जो आज के भटकते समाज के लिए एक दिशा-सूचक दीपस्तंभ है।
आज का विषय “पंच परिवर्तन” है,लेकिन मैं स्पष्ट कहना चाहती हूँ कि यह कोई सरकारी योजना नहीं
यह कोई मंचीय नारा नहीं
यह है राष्ट्र पुनर्निर्माण का शास्त्र।
पंच परिवर्तन नारा नहीं, राष्ट्र निर्माण का सूत्र है।
इसमें स्वभाव परिवर्तन
जब तक व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता, अहंकार और स्वार्थ को नहीं छोड़ेगा,तब तक कोई परिवर्तन संभव नहीं।
परिवार परिवर्तन
परिवार केवल रहने की जगह नहीं,वह संस्कारों की पहली पाठशाला है।
समाज परिवर्तन
जाति, वर्ग, भाषा के नाम पर बंटा समाज कभी सशक्त नहीं हो सकता।
हमें समरसता की ओर बढ़ना होगा।
राष्ट्र परिवर्तन
राष्ट्र सर्वोपरि यह भाव जब तक हृदय में नहीं होगा,
तब तक विकास केवल आंकड़ों में रहेगा, वास्तविकता में नहीं।
विश्व परिवर्तन
भारत का दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्” है
हम केवल अपने लिए नहीं, समस्त विश्व के कल्याण के लिए जीते हैं।
आज समाज एक अजीब द्वंद्व में है साधन बढ़ रहे हैं, लेकिन साधना घट रही है,
जानकारी बढ़ रही है, लेकिन विवेक कम हो रहा है,भीड़ बढ़ रही है, लेकिन चरित्र खो रहा है
ऐसे समय में,भगवत शरण माथुर जी जैसे व्यक्तित्व
हमें याद दिलाते हैं कि
राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों से नहीं,चरित्र से होता है।
मैं आप सभी से कहना चाहती हूँ कि आज आप केवल श्रद्धांजलि मत दीजिए,आज केवल भाषण मत सुनिए,आज एक संकल्प लीजिए कि
मैं स्वयं को बदलूंगा
अपने परिवार को संस्कारित करूंगा,
समाज में समरसता फैलाऊंगा,राष्ट्र को सर्वोपरि रखूंगा,क्योंकि जब व्यक्ति बदलता है,तभी युग बदलता है।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगी कि स्व. भगवत शरण माथुर जी का जीवन हमें चुनौती देता है कि हम सुविधा के नहीं,सिद्धांत के रास्ते पर चलें।
अगर हम सच में उन्हें श्रद्धांजलि देना चाहते हैं,
तो हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना होगा।
आइए हम सब मिलकर “पंच परिवर्तन” को केवल शब्द नहीं,बल्कि अपने जीवन का संकल्प बनाएं।
इन शब्दों के साथ बाल कथावाचक उन्नति मिश्रा ने सभा मे उपस्थित सभी श्रोताओं /उपस्थित जनों को भाव विभोर कर दिया।











