कभी-कभी क्रिकेट का सबसे बड़ा फ़ैसला वह नहीं होता जो मैदान पर लिया जाता है, बल्कि वह होता है जो टीम की शीट में एक नाम जोड़ देता है और दूसरा नाम ख़ामोशी से मिटा देता है। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टी-20 मुक़ाबले में जब संजू सैमसन का नाम प्लेइंग इलेवन से ग़ायब था, तो हैरत सिर्फ़ दर्शकों को नहीं हुई। क्रिकेट की दुनिया के कई बड़े नामों ने भी इस फ़ैसले पर सवाल उठाए। सबसे तीखी और दिलचस्प आवाज़ उस खिलाड़ी की रही, जिसने बरसों भारतीय ड्रेसिंग रूम की नब्ज़ को बहुत क़रीब से महसूस किया है , रविचंद्रन अश्विन।
अश्विन का मानना है कि यह सिर्फ़ एक चयन नहीं, बल्कि एक ऐसा फ़ैसला था जिसने कई असहज सवाल पैदा कर दिए। उनका कहना है कि कोच गौतम गंभीर और सपोर्ट स्टाफ के दूसरे सदस्य भी भीतर ही भीतर जानते होंगे कि संजू सैमसन के साथ इंसाफ़ नहीं हुआ। जिस बल्लेबाज़ ने इसी साल टी-20 विश्व कप में ‘प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट’ बनकर भारत को ख़िताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई, उसे सिर्फ़ तीन नाकाम पारियों के बाद बाहर बैठा देना अश्विन को जल्दबाज़ी लगा।
उनकी सबसे बड़ी फ़िक्र सिर्फ़ टीम संयोजन नहीं, बल्कि एक खिलाड़ी का मनोबल था। अश्विन ने सवाल उठाया कि अब जब संजू अभ्यास सत्र में उतरेंगे, तो उनके भीतर वही जोश कैसे रहेगा? क्या उन्हें अब नंबर तीन पर ईशान किशन के बैकअप के रूप में देखा जाएगा? उनके मुताबिक़ टीम के शीर्ष क्रम में पहले ही अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन जैसे तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज़ मौजूद हैं। ऐसे में संजू की भूमिका अचानक बदल जाना कई नए सवाल छोड़ जाता है।
अश्विन ने अपनी बात को शेयर बाज़ार की मिसाल से और भी असरदार बना दिया। उनका कहना था कि जिस खिलाड़ी ने लंबे समय तक आपको शानदार रिटर्न दिया हो, उसे कुछ ख़राब दिनों की वजह से तुरंत बाहर नहीं किया जाता। ऐसे खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना ही बड़ी टीमों की पहचान होती है। उनके मुताबिक़ कभी-कभी कठिन फ़ैसले ज़रूरी होते हैं, लेकिन हर कठिन फ़ैसला सही भी हो, यह ज़रूरी नहीं।
इतना ही नहीं, उन्होंने एक और अहम मुद्दा उठाया। क्या सोशल मीडिया का शोर अब टीम के फ़ैसलों तक पहुँचने लगा है? अश्विन का मानना है कि भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताक़त हमेशा यही रही कि ड्रेसिंग रूम के दरवाज़े के बाहर का शोर भीतर दाख़िल नहीं होने दिया जाता था। उन्होंने कहा कि अपने लंबे क्रिकेट जीवन में उन्होंने कई कप्तान और कई दौर देखे हैं, लेकिन सफल टीमें वही रही हैं जिन्होंने बाहरी आवाज़ों को अपने फ़ैसलों पर हावी नहीं होने दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ संजय मांजरेकर की राय भी लगभग इसी दिशा में दिखाई दी। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को शानदार बताया, लेकिन संजू सैमसन को बाहर किए जाने को बेहद अजीब फ़ैसला करार दिया। उनके मुताबिक़ अगर टीम प्रबंधन वैभव को मौका देना ही चाहता था, तो उन्हें तीसरे नंबर पर उतारा जा सकता था। इसके लिए संजू को बाहर बैठाने की कोई मजबूरी नहीं थी। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अगर संजू चोटिल नहीं थे, तो यह चयन समझ से परे है। … और अगर उन्हें रेस्ट दिया गया है तो सिर्फ़ उन्हें ही क्यूं? बाक़ी के बड़े बैटर तो इस टीम में हैं ही।
संजू सैमसन जो सिर्फ़ एक फॉरमेट की क्रिकेट खेल रहा उसके रेस्ट देने की बात हलक़ से उतर नहीं रहा है।
मांजरेकर का मानना है कि टीम में उनके नाम के साथ कोई छेड़छाड़ किए बग़ैर ही बल्लेबाज़ी क्रम में थोड़ा फेरबदल करके दोनों खिलाड़ियों को एक साथ मौक़ा दिया जा सकता था। एक ओर संजू सैमसन थे, जिन्होंने कुछ महीने पहले टी-20 विश्व कप के सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल में लगातार दो 89 रनों की यादगार पारियां खेलकर ‘प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट’ का सम्मान हासिल किया था। दूसरी ओर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी थे, जिन्होंने आईपीएल में 230 से अधिक के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी कर पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।
वैभव ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबले में सिर्फ़ 10 गेंदों पर 14 रन बनाए, लेकिन उन दो छक्कों ने यह एहसास ज़रूर करा दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेख़ौफ़ है। साथ ही उन्होंने सबसे कम उम्र में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया और इस मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया। लेकिन इस चमकदार शुरुआत के साथ एक सवाल अब भी लोगों के ज़ेहन में उठ रहा होगा कि ‘ क्या किसी नई सुबह का स्वागत करने के लिए पिछली रोशनी को इतनी जल्दी बुझा देना ज़रूरी था? ‘
शायद यही वजह है कि इस चयन पर बहस सिर्फ़ संजू और वैभव तक सीमित नहीं रही। अब चर्चा उस संतुलन की है, जहाँ भविष्य को जगह देने के साथ-साथ अतीत के भरोसे को भी सम्मान मिले। क्योंकि बड़ी टीमों की पहचान सिर्फ़ नए सितारे गढ़ने से नहीं होती, बल्कि उन खिलाड़ियों का हाथ थामे रखने से भी होती है जिन्होंने मुश्किल वक़्त में टीम को जीत की राह दिखाई हो।
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