कर्नाटक हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक महत्वपूर्ण झटका दिया है, जब उनकी याचिका MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) मामले में खारिज कर दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमीन घोटाले के संबंध में सिद्धारमैया के खिलाफ केस चलेगा।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने इस मामले में जांच के लिए अपनी मंजूरी दी थी, जिसके बाद सिद्धारमैया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब, इस फैसले के बाद उनके लिए स्थिति और कठिन हो गई है। दूसरे पक्ष के वकील ने कहा है कि यदि लोकायुक्त की कार्रवाई से संतोषजनक परिणाम नहीं मिलता, तो सीबीआई जांच की मांग भी की जा सकती है।
संभावित कदम
1. डबल बेंच में अपील: मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया एकल संवैधानिक पीठ के फैसले के खिलाफ डबल बेंच में अपील कर सकते हैं। अगर डबल बेंच याचिका स्वीकार कर लेता है, तो इससे उन्हें राहत मिल सकती है।
2. जन प्रतिनिधि कोर्ट में कार्रवाई: आज के हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी जन प्रतिनिधि कोर्ट को मिल जाएगी। अगर कोर्ट केस दर्ज करने के निर्देश देता है, तो इस सप्ताह के भीतर FIR भी दर्ज की जा सकती है। जांच की जिम्मेदारी लोकायुक्त पुलिस या कर्नाटक पुलिस के किसी विशेष विंग को सौंपी जा सकती है।
मुख्यमंत्री की स्थिति
सिद्धारमैया की उम्मीदें अब पूरी तरह से डबल बेंच पर टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री कैंप ने स्पष्ट किया है कि यदि डबल बेंच से भी उन्हें राहत नहीं मिलती, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विचार कर रहे हैं। इस बीच, सिद्धारमैया ने यह भी कहा है कि वे इस्तीफा देने के मूड में नहीं हैं।
इस स्थिति में, उनके राजनीतिक भविष्य और आगामी कदम महत्वपूर्ण होंगे। अगर डबल बेंच उनकी याचिका पर सुनवाई स्वीकार कर लेता है, तो यह उनके लिए राहत का एक मौका हो सकता। अन्यथा, सुप्रीम कोर्ट में अपील करना उनके लिए अगला कदम होगा।










