आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने हाल के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के लिए अहंकार को जिम्मेदार ठहराया है। जयपुर के पास कनोता में एक कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने गुरुवार को कहा, ‘जो लोग भगवान राम की भक्ति करते थे, वे धीरे-धीरे अहंकारी हो गए। उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी घोषित किया गया था, लेकिन अहंकार के कारण भगवान राम ने उन्हें 241 पर रोक दिया। उनके इस कथन के बाद देश भर में इसको लेकर बवाल मच गया। उधर, आरएसएस ने इस कथन पर कहा है कि ये इंद्रेश कुमार की राय है। आरएसएस की नहीं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों पर एक बड़ा बयान दिया है। जयपुर के पास कानोता में ‘रामरथ अयोध्या यात्रा दर्शन पूजन समारोह’ को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा को ‘अहंकारी’ और विपक्षी इंडिया ब्लॉक को ‘राम विरोधी’ करार दिया। बता दें कि इसके पूर्व आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अहंकार को लेकर नसीहत दी थी। फिर संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र में बीजेपी के ख़राब प्रदर्शन के लिए बीजेपी नेताओं के अति आत्मविश्वास को वजह बताया गया।
इंद्रेश कुमार ने सत्तारूढ़ भाजपा के ‘अहंकार’ के साथ ही विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक की ‘राम विरोधी’ के रूप में पहचान की आलोचना की। आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य कुमार ने साफ़ तौर पर किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेत दिया कि चुनाव के नतीजों में उनके रवैये की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने भगवान राम की भक्ति की, लेकिन अहंकारी हो गई, उसे 241 पर रोक दिया गया, लेकिन उसे सबसे बड़ी पार्टी बना दिया गया। उनका इशारा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की ओर था। बीजेपी को लोकसभा में 240 सीटें मिली हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से इंडिया ब्लॉक का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों को राम में कोई आस्था नहीं थी, उन्हें एक साथ 234 पर रोक दिया गया।’
यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान के कुछ दिनों बाद आई है। मोहन भागवत ने कहा था कि एक सच्चे ‘सेवक’ में अहंकार नहीं होता और वह ‘मर्यादा’ बनाए रखते हुए लोगों की सेवा करता है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, “जो सच्चे सेवक होते हैं, जिन्हें असली सेवक कहा जा सकता है, वह कभी भी मर्यादा में रहते हैं और उसका पालन करते हैं। जो मर्यादा का पालन करने वाला होता है, वह काम तो करता है लेकिन काम को लेकर अहंकार नहीं करता। उसे यह घमंड नहीं होता कि मैंने यह किया। सेवक कहलाने का अधिकार सिर्फ ऐसे ही लोगों को है।
संघ से जुड़ी एक पत्रिका ऑर्गनाइजर ने एक लेख छापा है जिसमें कहा गया है कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकसभा चुनाव में मदद के लिए आरएसएस से संपर्क नहीं किया और इस वजह से पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पत्रिका में छपे लेख में संपर्क नहीं करने की जो बात कही गई है उसकी पुष्टि एक इंटरव्यू में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी लोकसभा चुनाव के दौरान ही की थी।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय और मौजूदा समय में काफी कुछ बदल चुका है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से इंटरव्यू में कहा था कि ‘पहले हम इतनी बड़ी पार्टी नहीं थे और अक्षम थे, हमें आरएसएस की जरूरत पड़ती थी, लेकिन आज हम काफी आगे बढ़ चुके हैं और अकेले दम पर आगे बढ़ने में सक्षम हैं।’










