सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने पूछा है कि भारतीय स्टेट बैंक ने पूरी जानकारी क्यों नहीं दी.
सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड पर एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कुछ भी ना छुपाया जाए. सबकुछ सार्वजनिक होना चाहिए. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ ने पूरी जानकारी क्यों नहीं दी?
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा,’फैसले में स्पष्ट था कि सभी विवरणों का खुलासा किया जाना चाहिए. कुछ भी चयनात्मक न हो. कोर्ट के आदेशों पर निर्भर न रहें. एसबीआई ने पूरी जानकारी क्यों नहीं बताई? कोर्ट ने आगे कहा कि प्रत्येक कल्पनीय विवरण का खुलासा किया जाना चाहिए. एसबीआई चीफ अदालत के फैसले का पालन करने के लिए बाध्य हैं.’
चुनावी बॉन्ड पर सभी जानकारी का खुलासा हो’
इस दौरान SBI की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील हरीश साल्वे ने कहा कि कृपया उन्हें यह समझाने का मौका दिया जाए कि उन्होंने आदेश को कैसे समझा है. इस पर सीजेआई ने कहा कि हम चाहते हैं कि चुनावी बांड से संबंधित सभी जानकारी का खुलासा किया जाए. जो भी जानकारी आपके पास है, सबका खुलासा हो.
फिक्की और एसोचैम की तरफ से पेश हुए रोहतगी
मामले में सीनियर वकील मुकुल रोहतगी फिक्की और एसोचैम की तरफ से पेश हुए. रोहतगी ने कहा कि इसके लिए उन्होंने एक आवेदन दायर किया है. हालांकि, इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारे पास ऐसा कोई आवेदन नहीं आया है. CJI ने कहा कि आप फैसला सुनाए जाने के बाद यहां आए हैं. हम अभी आपको नहीं सुन सकते.
2019 के पहले का डाटा भी किया गया जारी!
बता दें कि चुनाव आयोग ने हाल ही में राजनीतिक दलों द्वारा सीलबंद कवर के तहत जमा किए गए चुनावी बांड के विवरण को सार्वजनिक कर दिया. माना जा रहा है कि विवरण 12 अप्रैल, 2019 से पहले की अवधि से संबंधित हैं. इस तारीख के बाद के चुनावी बांड विवरण पिछले सप्ताह चुनाव पैनल द्वारा सार्वजनिक किए गए थे. चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा था कि राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल,2019 के अंतरिम आदेश के निर्देशानुसार, सीलबंद कवर में चुनावी बांड का डेटा दाखिल किया










