कैबिनेट ने अंतरिक्ष सेक्टर में एफडीआई पॉलिसी में संशोधन को दी मंजूरी, 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतरिक्ष क्षेत्र के संबंध में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति में संशोधन को मंजूरी प्रदान की। एफडीआई नीति में संशोधन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा निर्धारित आत्मनिर्भर भारत विज़न को साकार करने के लिए किया गया है। अब, अंतरिक्ष क्षेत्र को निर्धारित उप-क्षेत्रों और गतिविधियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए उदार बना दिया गया है। संशोधित एफडीआई नीति के अंतर्गत अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतरिक्ष क्षेत्र के संबंध में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति में संशोधन को मंजूरी प्रदान की। एफडीआई नीति में संशोधन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा निर्धारित आत्मनिर्भर भारत विज़न को साकार करने के लिए किया गया है। अब, अंतरिक्ष क्षेत्र को निर्धारित उप-क्षेत्रों और गतिविधियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए उदार बना दिया गया है। संशोधित एफडीआई नीति के अंतर्गत अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। दरअसल एफडीआई नीति में सुधार देश में कारोबार में सुगमता बढ़ाएगा, जिससे एफडीआई प्रवाह बढ़ेगा और इस प्रकार यह निवेश, आय और रोजगार में वृद्धि में योगदान देगा।

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतरिक्ष क्षेत्र के संबंध में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में संशोधन को मंजूरी प्रदान की है, जिसके तहत उपग्रह उप-क्षेत्र को ऐसे प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए परिभाषित सीमाओं के साथ तीन अलग-अलग गतिविधियों में विभाजित किया गया है।

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 को संवर्धित निजी भागीदारी के माध्यम से अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के सामर्थ्‍य का पता लगाने के विजन को लागू करने के लिए एक व्यापक, समग्र और गतिशील ढांचे के रूप में अधिसूचित किया गया था। उक्त नीति का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाना, अंतरिक्ष में सफल व्यावसायिक उपस्थिति विकसित करना, अंतरिक्ष का उपयोग प्रौद्योगिकी विकास के चालक के रूप में करना और संबद्ध क्षेत्रों में लाभ प्राप्त करना, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को आगे बढ़ाना और सभी स्टेकहोल्डरों के बीच अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए इकोसिस्‍टम तैयार करना है।

मंत्रालय ने बताया कि अंतरिक्ष विभाग ने इन-स्पेस, इसरो और एनएसआईएल जैसे आंतरिक स्टेकहोल्डरों के साथ-साथ कई औद्योगिक स्टेकहोल्डरों के साथ परामर्श किया है। एनजीई ने उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के क्षेत्र में क्षमताएं और विशेषज्ञता विकसित की है। निवेश बढ़ने से वे उत्पादों की विशेषज्ञता, प्रचालन के वैश्विक पैमाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में बढ़ी हुई हिस्सेदारी हासिल करने में सक्षम होंगे। यह प्रस्तावित सुधार उदारीकृत प्रवेश मार्ग निर्धारित करके तथा उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और संबंधित प्रणालियों या उप प्रणालियों में एफडीआई के लिए स्पष्टता प्रदान करके, अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित और रिसीव करने के लिए स्पेसपोर्ट का निर्माण और अंतरिक्ष से संबंधित घटकों और प्रणालियों के निर्माण द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में एफडीआई नीति प्रावधानों को उदार बनाने का प्रयास है।

उल्लेखनीय है कि संशोधित एफडीआई नीति के अंतर्गत अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। संशोधित नीति के अंतर्गत उदारीकृत प्रवेश मार्गों का उद्देश्य संभावित निवेशकों को अंतरिक्ष में भारतीय कंपनियों में निवेश करने के लिए आकर्षित करना है।

प्राइवेट सेक्टर की इस बढ़ी हुई सहभागिता से रोजगार सृजन, आधुनिक टेक्नोलॉजी को आत्मसात करने और क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। इससे देश की कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन में एकीकृत किए जाने की संभावना है। इससे कंपनियां सरकार की ‘मेक इन इंडिया (एमआईआई)’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को विधिवत प्रोत्साहित करते हुए देश के भीतर अपनी विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने में सक्षम होंगी।

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