फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर नियंत्रण पाकर उसे बुझा दिया । एसीपी विनोद दीक्षित के मुताबिक अनिता की मौत झुलसने और दम घुटने से हुई।
क्लर्क कालोनी में मंगलवार सुबह किराना कारोबारी के मकान को आग ने चपेट में ले लिया। हादसे में कारोबारी की लकवाग्रस्त पत्नी की मौत हो गई। बेटे को बचा लिया गया।
घटना सुबह करीब 10.15 बजे एमआर-9 (आइटीआइ के सामने) जितेंद्र उर्फ पप्पू गोयल (मंगू नेता) के घर की है। जितेंद्र का मांगीलाल-बद्रीलाल ब्रदर्स के नाम से किराने का कारोबार है। तल मंजिल पर किराने की दुकान है। पहली और दूसरी मंजिल पर परिवार रहता है।
आग की खबर फोन पर मिली
सुबह करीब 9.40 बजे जितेंद्र परदेशीपुरा स्थित दुकान पर थे। तभी फोन पर खबर मिली कि घर में आग लग गई है। कर्मचारी रजत को लेकर आए तो देखा पूरा मकान जल रहा है। पत्नी अनिता उर्फ अन्नू और बेटा मयंक आग में फंस गए।
भीषण थी आग, सीढ़ियों से लौटना पड़ा
रहवासी और रिश्तेदारों ने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि सीढ़ियों से लौट आए। अन्नू पहली मंजिल पर बने कमरे में थी, जबकि मयंक दूसरी मंजिल के कमरे में। सेंट्रलाइज एसी और सीलिंग-फर्नीचर के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया और दूसरी मंजिल तक जा पहुंची।
अंदर ही हो चुकी थी महिला की मौत
दमकलकर्मियों के आने पर करीब एक घंटे बाद 54 वर्षीय अनिता को निकाला, लेकिन उसकी मौत हो गई। 28 वर्षीय मयंक खतरे से बाहर है। गोयल परिवार विधायक और कैबिनेट मंत्री का भी करीबी है। उनकी एमबी लाजिस्टिक के नाम से टैक्सी (कारें) चलती हैं।
फायर ब्रिगेड रास्ता भटकी, लोगों ने बाल्टी से पानी डाला
आग की लपटें दूर तक नजर आ रही थीं। फायर ब्रिगेड और पुलिस रेडीमेड कांप्लेक्स पहुंच गए। तब तक एमबी लाजिस्टिक के कर्मचारी अखिलेश प्रजापति, महेश डाले, अनिल और देशराज व पार्षद धर्मेंद्र मौर्य, राजू भदौरिया भी पहुंच गए। पड़ोसी अरविंद शर्मा और मेवाबाई राठौर के घर से पानी लेकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन पानी कम पड़ गया। काफी देर बाद एसआइ (फायर) सुशील कुमार दुबे गाड़ी लेकर पहुंचे और आगे के कांच फोड़े। बमुश्किल अंदर घुसे और अनिता को निकाला गया। एसीपी विनोद दीक्षित के मुताबिक अनिता की मौत झुलसने और दम घुटने से हुई।

सीढ़ियों से लौटा और फूट-फूटकर रोता रहा, आठ दिन बाद बेटे का रिश्ता तय करना था
मैंने अनिता को बचाने के लिए पहली मंजिल तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन लपटों के कारण लौट आया। मैं फूट-फूटकर रोने लगा। एक साल पूर्व ही घर बनाया था। बेटों ने कहा था कि इतना पैसा मत लगाओ, लेकिन मैंने तीन प्लाट बेच कर घर बनाया। पूरे घर में फर्नीचर और सेंट्रलाइज ऐसी लगवाए। आठ दिन बाद तो बड़े बेटे विकास का रिश्ता तय करना था। मेरी आंखों के सामने सारी खुशियां मातम में बदल गईं। घटना के वक्त विकास खाटू श्याम (राजस्थान) में था। उसे लोगों ने काल कर बताया कि पूरा मकान जल चुका है।











