अपनी कमाई में कोई सेंध ना लगे, इसके लिए कंपनियां अपने कर्मचारियों पर तलवार चलाती हैं. दिन-रात मेहनत करके काम करने वाला कर्मचारी एकएका सड़क पर आ जाता है. ईएमआई की किस्तों पर चल रही आम आदमी का जीवन एक झटके में संकट में पड़ जाता है. एक बड़ी कंपनी के हजारों कर्मचारियों के सामने ये मुसीबत आने वाली है. नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी सिस्को सिस्टम्स से खबर मिली है कि वह अपने यहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छटनी करने जा रही है.
सिस्को सिस्टम्स का कहना है कि उसने अपना सालाना राजस्व का लक्ष्य कम कर दिया है. और इसके लिए कंपनी ने अपने कार्यबल-वर्कफोर्स में 5 प्रतिशत तक की कटौती करेगी. इससे कंपनी के 4,000 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है. कंपनी में वर्तमान में लगभग 85,000 कर्मचारी हैं. कंपनी का कहना है कि वह छंटनी और रिस्ट्रक्चरिंग पर विचार कर रही है.
जानकारी के मुताबिक, सिस्को सिस्टम्स ने अपने राजस्व का अनुमान 53.88-55 से घटाकर 51.5-52.5 अरब डॉलर कर दिया है. कंपनी के इस फैसले से उसके स्टॉक में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली है. सिस्को सिस्टम्स का स्टॉक इस समय 50.28 अमेरिकी डॉलर पर ट्रेड कर रहा है. बीते एक महीने में इसका स्टॉक लगातार गोते खा रहा है. 30 जनवरी को यह स्टॉक 52 डॉलर से अधिक पर था.
सिस्को सिस्टम्स के प्रमुख चार्ल्स रॉबिंस ने पिछले दिनों अपने संबोधन में कहा था कि कंपनी के टेलीकॉम और केबल सर्विस के बीच मांग लगातार कम हो रही है. मनी कंट्रोल के मुताबिक, सिस्को अपनी ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस-एआई और एनवीडिया के साथ साझेदारी करने पर फोकस कर रही है.
बता दें कि सिस्को सिस्टम्स एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय डिजिटल संचार प्रौद्योगिकी समूह है. इसका मुख्यालय सैन जोस, कैलिफोर्निया में है. सिस्को नेटवर्किंग हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, दूरसंचार उपकरण और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी सेवाओं और उत्पादों का विकास, निर्माण और बिक्री करता है. सिस्को दुनिया की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में से एक है. फॉर्च्यून 100 में यह 82वें स्थान पर है.
सिस्को सिस्टम्स की स्थापना दिसंबर 1984 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के दो कंप्यूटर वैज्ञानिक लियोनार्ड बोसैक और सैंडी लर्नर ने की थी. उन्होंने मल्टीप्रोटोकॉल राउटर सिस्टम पर दूर के कंप्यूटरों को जोड़ने के लिए उपयोग किए जाने वाले स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (LAN) सिस्टम तैयार करने का बीड़ा उठाया. 1990 में जब कंपनी सार्वजनिक हुई, तब तक सिस्को का बाज़ार पूंजीकरण 224 मिलियन डॉलर था. वर्ष 2000 में यह बढ़कर 500 बिलियन डॉलर हो गया और माइक्रोसॉफ्ट को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई.










