Farmers Protest: दिल्ली की सीमाओं पर बवाल, शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले

दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों पंजाब से निकलकर मार्च करते हुए हरियाणा के अंबाला हाईवे से होते हुए पंजाब-हरियाणा की शंभू बॉर्डर पर पहुंच गए. यहां पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर कर दिया. आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद यहां भगदड़ मच गई.

किसान आंदोलन 2.0 के लिए दिल्ली की तरफ बढ़ रहे किसानों के खिलाफ एक्शन की शुरुआत हो गई है. पंजाब-हरियाणा की शंभू बॉर्डर से दिल्ली की तरफ आगे बढ़ रहे किसानों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे हैं, जिसके बाद भगदड़ के हालात बन गए हैं और बवाल शुरू हो गया है. पुलिस और सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारी किसानों को 200 मीटर तक पीछे धकेल दिया है. भारी तादाद में सुरक्षाबल तैनात हैं. सड़क को कंक्रीट की
दीवारों से बंद कर दिया गया

दरअसल, दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों को पंजाब पुलिस ने बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ने दिया, जिसके बाद वह मार्च करते हुए हरियाणा के अंबाला हाईवे से होते हुए पंजाब-हरियाणा की शंभू बॉर्डर पर पहुंच गए. यहां हरियाणा पुलिस ने रास्तों को बड़े-बड़े कंक्रीट के बैरिकेड्स से जाम कर रखा था, जिसे किसान लांघने की तैयारी कर रहे थे. इस दौरान अंबाला के शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर आंसू गैस के गोले दाग दिए और वहां भगदड़ मच गई.

बातचीत के लिए हैं तैयार: पंढेर

किसानों के प्रदर्शन के बीच किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का बयान आया है. उन्होंने कहा है कि वह नहीं चाहते हैं किसी तरह की अव्यवस्था हो. उन्होंने कहा कि किसाान संगठन सरकार के साथ टकराव से बचना चाहते हैं और कुछ हासिल हो, इसी आशा और भरोसे की वजह से ही मीटिंग में बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा के हर गांव में पुलिस भेजी जा रही है. ऐसा लग रहा है कि पंजाब और हरियाणा भारत के राज्य नहीं हैं, बल्कि इंटरनेशनल बॉर्डर बन गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार बुलाना चाहेगी तो वह बातचीत के लिए तैयार हैं.

प्रदर्शन में शामिल हैं ये संगठन

किसान आंदोलन में किसान मजदूर मोर्चा, सरवन सिंह पंढेर की किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह, भारतीय किसान यूनियन जनरल सिंह और भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद दिलबाग सिंह और गुरमननित सिंह की प्रोग्रेसिव फार्मर फ्रंट इस आंदोलन में शामिल हैं.

इन मांगों को लेकर डटे हैं किसान

1. किसानों की सबसे खास मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानून बनना है. 
2. किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी कर रहे हैं.
3. आंदोलन में शामिल किसान कृषि ऋण माफ करने की मांग भी कर रहे हैं.
5. भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर निकाला जाए.
6. कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाया जाए
7. किसानों और 58 साल से अधिक आयु के कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना लागू करके 10 हजार रुपए प्रति माह पेंशन दी जाए
8. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार की ओर से स्वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान करना, सभी फसलों को योजना का हिस्सा बनाना और नुकसान का आकल करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन करना.
9. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार की ओर राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाना चाहिए.
10. कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए.

16 फरवरी को भारत बंद का आह्वान

ऑल इंडिया किसान सभा ने भी किसानों के आंदोलन से फिलहाल दूरी बनाई हुई है, जबकि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 16 फरवरी को राष्ट्रव्यापी भारत बंद का आह्नान किया गया है, जिसमें तमाम किसान और मजदूर पूरे दिन हड़ताल और काम बंद करेंगे. दोपहर 12 बजे से लेकर के शाम 4 बजे तक देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों का घेराव किया जाएगा और हाईवे बंद किए जाएंगे. ऑल इंडिया किसान सभा का कहना है
कि सरकार ने स्वामीनाथन को भारत रत्न दे दिया, लेकिन उनकी सिफारिश नहीं मानी गई हैं.

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