????ऑनलाइन सट्टेबाजी???? दुबई में दुबके सट्टा किंग से जुड़ रहे ऑनलाइन सट्टा के तार, महादेव एप का फैला नेटवर्क, छत्तीसगढ़ से भी जुड़ रहे तार, मुख्य सरगना दुर्गेश की गिरफ्तारी के बाद खुल सकता है बड़ा राज

कटनी। सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में गैतरा निवासी 17 बेरोजगार युवकों को अवैध लाभ का ख्वाब दिखाकर उनके खाते खुलवाते हुए सट्टे के लिए किए गए करोड़ों रुपए के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन मामले के तार शहर के नामी सटोरिए से जुड़ने लगे हैं। सट्टा किंग भले ही दुबई में दुबका हो लेकिन इस बड़े नेटवर्क में उसकी संलिप्तता को इनकार नहीं किया जा सकता। सट्टे के तार पंजवानी से जुड़ते नजर आ रहे हैं। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी कुछ भी कहने से बच रही है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के पास से मिले रिकॉर्ड में भले ही 4 करोड़ का हिसाब मिला है। लेकिन यह रकम कई करोड़ में है। जैसे-जैसे पुलिस इन बैंक खातों के ट्रांजैक्शन यूपीआइ होल्डरों के केवाईसी का पता लगाएगी वैसे-वैसे बड़े कांड का पर्दाफाश होगा।
सूर्योदय बैंक के इस सनसनीखेज प्रकरण सामने आने के बाद पुलिस द्वारा किए गए खुलासे से यह बात साफ हो गई है कि यह पूरा खेल सट्टे से जुड़ा हुआ है। पूरा मायाजाल महादेव एप सहित अन्य एपो का है। जिनका पता लगाया जा रहा है। इस ऐप का नेटवर्क ही बेनामी कमाई के लिए शहर से लेकर देशभर के लोगों को जोड़ रहा है। इसके सरगना का भी पुलिस पता लगा रही है।

बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग का केस होने के कारण पुलिस भी इस अध्याय को जल्दी समेटने की फिराक में है। इसका पर्दाफाश करने के लिए हैंडलर दुर्गेश यादव को दबोचने में पुलिस लगी हुई है। इस बड़े मामले में ईडी की एंट्री होने की संभावना भी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी के सुराग का पता चल गया था। दुर्गेश घर में संपर्क करना शुरू कर दिया था। लेकिन पुलिस विभाग से कुछ दिन पहले ही सेवा निवृत हुए अधिकारी की भूमिका के कारण उसने संपर्क साधना बंद कर दिया

क्रिकेट सहित कई खेल और वर्चुअल सट्टा

पुलिस की माने तो ये बदमाश क्रिकेट सट्टा ही नहीं बल्कि और कई खेलों में सट्टा खिला रहे थे। पूरा गेम वर्चुअल चलता था। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल सहित गतिविधियों पर अवैध लाभ कमाने का खेल फल फूल रहा है। भोपाल से ऑपरेट होने वाले सट्टे का सरगना कौन है अभी इसका पता पुलिस नहीं लगा पाई है।
चल रही पूछताछ

पुलिस ने कुछ आरोपियों को रिमांड पर लिया है। उनसे इस पूरे खेल के संबंध में पूछताछ की जा रही है। युवकों के पास से पुलिस ने रिकॉर्ड भी जप्त किए हैं। जिनका बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। उनके मोबाइल टैबलेट आदि में मिले पोर्टल और एप में भी वास्तविकता को पुलिस खंगाल रही है।
बैंकों से पूछता जारी

पुलिस बैंकों से अभी भी पूछताछ कर रही है। करोड़ों रुपए के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन मामले में पुलिस एयू बैंक, बंधन बैंक, आईडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक सहित अन्य बैंकों के रिकॉर्ड को खग्गल रही है। निजी बैंकों से समय पर जानकारी न मिलने के कारण भी जांच कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क

ऑनलाइन सट्टे का यह जाल किसी बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग से कम नहीं है। पुलिस की माने तो अभी तक प्रारंभिक जांच में चार करोड रुपए का हिसाब मिला है। यह आंकड़ा 50 करोड़ से भी अधिक हो सकता है। इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। जिसका पता लगाने में पुलिस लगी हुई है। बड़ी मात्रा में रकम का अवैध कारोबार हुआ है इसलिए इस संबंध में ईडी द्वारा भी पूछताछ की जा सकती है। पुलिस भी मामले को ईडी में भेजने की पहल कर सकती है।
महादेव एप का मायाजाल

ऑनलाइन सट्टे का पूरा कारोबार महादेव एप सहित अन्य पोर्टल व एप के माध्यम से हुआ है। सूत्रों की माने तो टेलीग्राम में महादेव की सर्चिंग करते ही पूरा नेटवर्क लोगों के सामने आ जाता है और फिर इसमें दर्ज नंबर में क्लिक करते ही लोग व्हाट्सएप से जुड़ जाते हैं और फिर बातचीत शुरू कर सट्टा खेलना शुरू कर दे रहे थे। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले छत्तीसगढ़ में मचे बवाल में भी इसी एप का नाम सामने आया था। वहां से भी इसके तार जुड़ रहे हैं।

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